राहुल नेत्रा नेगी के गढ़वाली गीत ‘हवा सर-सर’ ने यू ट्यूब पर धूम मचा दी है। लोग उनके गीत और गाने के अंदाज को काफी पसंद कर रहे हैं। करीब एक साल की मेहनत के बाद लांच किए गए इस गीत में पहाड़ की हवा के साथ उस खुशबू का भी अहसास होता है, जो पलायन के बाद शहर में बसने पर दिलोदिमाग में छाई रहती है। गीत में पलायन का दर्द है तो घर लौटने का संदेश भी है। उनके गीत को एक हफ्ते में दस हजार से अधिक लोग देख चुके हैं। साथ ही हजारों लाइक भी हैं।
राहुल नेत्रा नेगी मूल रूप से पौड़ी गढ़वाल के चरगढ़ गांव निवासी हैं। वर्तमान में 17 गढ़वाल राइफल्स से सेवानिवृत्त उनके पिता प्रेम सिंह नेगी और मां बसंती देवी रुड़की के समीप कीर्तिनगर ढंढेरा में रहते हैं। राहुल ने देहरादून के ग्राफिक एरा विश्वविद्यालय से एमसीए की डिग्री ली और फिर मुंबई में विप्रो कंपनी में जॉब करने लगे, लेकिन स्कूल के समय से ही संगीत उनकी रगों में बसा था। लिहाजा संगीत की दुनिया के लिए नौकरी छोड़कर तैयारी शुरू की। करीब एक साल की मेहनत के बाद हाल ही में उन्होंने गढ़वाली में ‘हवा सर-सर’ गीत को लांच किया, जो काफी मशहूर हो रहा है। उन्होंने इस गाने को यू ट्यूब पर लांच किया है।
एक सप्ताह में उनके गाने को दस हजार से अधिक लोग देख चुके हैं जबकि करीब 1300 लाइक मिले हैं। इससे पहले राहुल एक ओटीटी प्लेटफॉर्म पर रिलीज हुई हिना खान की फिल्म विश लिस्ट में भी ‘तेरा साथ’ गीत गा चुके हैं। खास बात यह है कि उन्होंने न केवल गीत को अपनी आवाज दी है बल्कि कंपोज भी किया है। उन्होंने बताया कि गाने की ऑडियो रिकार्डिंग देहरादून स्थित एक स्टूडियो में की गई है। अब उनका सपना एक अच्छा कंपोजर और सिंगर बनकर संगीत की दुनिया में नाम कमाने का है। संवाद
गीत के जरिये झलका पहाड़ प्रेम
राहुल बताते हैं कि गीत में पहाड़ों की सर-सर हवाओं से यह अहसास कराने की कोशिश की है कि किस तरह जब हम पहाड़ को छोड़कर शहरों में बस जाते हैं तो फिर उन्हीं हवाओं और बिखरी छटाओं की याद आती है। गीत में आखिर में दिखाया गया है कि गीतकार किस तरह अपना सभी काम निपटाने के बाद पहाड़ों की तरफ लौटने की तैयारी शुरू करता है।
हार्ड डिस्क गिरने पर दोबारा शूट करना पड़ा
राहुल ने बताया कि गीत को रिकॉर्ड करने में काफी मेहनत करनी पड़ी। एक बार हार्ड डिस्क गिर गई और फिर डाटा रिकवर नहीं हो पाया तो दोबारा रीमेक और शूट करना पड़ा।
गीत के बोल...
हवा सर सर चलनी होली मेरा पहाडूं मां
छवीं बथा जन लगाना होला डाली दगड्युं मां
सर सर सरसों फैलाणा होला खुशबू पुंगड़ियूं मां
पोथली चिलच्यानी होली दगड़ी एक सुर मां
कन भलु मिजाज तेरू पहाड़ा ओ हो।
हवा सर सर, हवा सर सर....