कांवड़ यात्रा का अंतिम चरण अब केवल आस्था का सफर नहीं बल्कि शिवभक्तों के लिए समय और संकल्प की परीक्षा भी है। हरिद्वार से गंगाजल लेकर गंतव्य की ओर लौट रहे लाखों कांवड़िये दिन, घंटे और दूरी का हिसाब लगाकर दौड़ लगा रहे हैं। किसी ने 24 घंटे में यात्रा पूरी करने का लक्ष्य रखा है तो कोई 36, 48 या 72 घंटे की समय सीमा के भीतर अपने शिवालय तक पहुंचने के संकल्प के साथ निकला है। सोमवार सुबह से लेकर देर रात तक हाईवे और कांवड़ मार्गों पर दौड़ते शिवभक्तों का सिलसिला लगातार जारी रहा।
दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान, पंजाब और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के अनेक जिलों से आए शिवभक्तों ने अपनी-अपनी दूरी के अनुसार समय तय कर रखा है। करीब 150 से 200 किलोमीटर की दूरी तय करने वाले कई जत्थे 24 से 36 घंटे में यात्रा पूरी करने का लक्ष्य लेकर चल रहे हैं जबकि 250 से 350 किलोमीटर दूर जाने वाले कांवड़िये 48 से 72 घंटे का समय निर्धारित कर रहे हैं।
यात्रा के दौरान उनके साथी लगातार समय पर नजर बनाए रखते हैं और निर्धारित अंतराल पर विश्राम, भोजन व जलपान की व्यवस्था करते हैं। सोमवार को रुड़की, नारसन, मंगलौर और दिल्ली-देहरादून हाईवे पर बड़ी संख्या में डाक कांवड़िये व दौड़ते हुए शिवभक्त दिखाई दिए। कई श्रद्धालु कंधे पर कांवड़ रखकर तेज कदमों से चलते नजर आए जबकि डाक कांवड़िये रिले रेस की तरह एक-दूसरे को कांवड़ सौंपते हुए आगे बढ़ रहे थे।
उनके साथ चल रहे वाहन और सहयोगी दल भी यात्रा की गति बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। शिवभक्तों का कहना है कि समय सीमा के भीतर जल चढ़ाने की परंपरा और संकल्प के कारण वे यात्रा को निर्धारित अवधि में पूरा करने का प्रयास करते हैं।
कई जत्थों ने मोबाइल एप और जीपीएस की मदद से दूरी व समय का पूरा हिसाब रखा हुआ है। कुछ समूह हर घंटे तय दूरी पूरी करने का लक्ष्य बनाकर आगे बढ़ रहे हैं ताकि अंतिम समय में किसी प्रकार की देरी न हो। यात्रा के अंतिम चरण में जैसे-जैसे शिवरात्रि और जलाभिषेक का समय नजदीक आ रहा है, वैसे-वैसे कांवड़ियों की रफ्तार भी बढ़ती जा रही है।