रुड़की। जिला पंचायत की सीटों पर जनता के निर्णय के बाद अब जिला पंचायत अध्यक्ष पद को लेकर कांग्रेस, बसपा के चार गुटों पर नजर टिक गई हैं। इनमें कांग्रेस में विधायक कुंवर प्रणव सिंह चैंपियन, ममता राकेश, पूर्व विधायक शहजाद एवं चौधरी राजेंद्र सिंह हैं।
नतीजों के बाद जहां कांग्रेस से खानपुर विधायक कुंवर प्रणव सिंह चैंपियन भी अपनी पत्नी रानी देवयानी को जिताकर इसमें बराबर की भूमिका में बन गए हैं, यही नहीं मोहनपुरा में समर्थक अरशद चेयरमैन व जौरासी में निर्दलीय नूरहसन की जीत ने चैंपियन के खेमे को और ताकत दी है। ठीक यही स्थिति भगवानपुर विधायक ममता राकेश की भी कही जाएगी। मानकपुर में कांग्रेस समर्थित प्रत्याशी के खिलाफ अपनी समर्थक बबली को उतारकर ममता ने बगावती तेवर तो जरूर दिखाए, लेकिन बबली की जीत से पार्टी में ममता की मजबूती का संदेश भी चला गया है। इसके अलावा दरियापुर दयालपुर सीट से सुबोध राकेश की जीत ने ममता की ताकत और अधिक बढ़ने से उनकी बोर्ड बनवाने में सबसे बड़ी कारगर मानी जा रही है। उधर चौ. राजेंद्र सिंह सिंह भले ही दो सीटों पर चुनाव हार चुके हों, लेकिन उनकी जिला पंचायत की अध्यक्ष की कुर्सी को पाने के लिए उनके पास बहुत कुछ है। उन्हें कोटवाल आलमपुर से जीतीं छोटे भाई अशोक चौ. की पत्नी सविता चौधरी को जिला पंचायत अध्यक्ष पद की दौड़ में बरकरार रखा है। यह जरूर है कि अब इसमें उनकी राह थोड़ी मुश्किल बन गई है। वहीं बसपा में पंचायत चुनाव की कमान संभाल रहे शहजाद के लिए छोटे भाई सत्तार व भाभी की जीत तो राहत देने वाली है। दो सीटें जीतकर शहजाद जिला पंचायत की कुर्सी को पाने के लिए फिर से पूरी दौड़ भाग करेंगे।