संपत्ति कर में पांच प्रतिशत तक की वृद्धि कर दी गई है जो एक अप्रैल 2026 से लागू होगी। उपभोक्ताओं को वर्तमान और आगामी वर्ष की वृद्धि का भुगतान एक साथ करना होगा। वहीं निगम के इस आदेश के विरोध में व्यापारी लामबंद होने लगे हैं। वादाखिलाफी का आरोप लगाकर आंदोलन की चेतावनी दी गई है।
2025 में टैक्स वृद्धि होनी थी। इसके लिए चार माह पूर्व निगम ने जनसुनवाई की थी लेकिन जलभराव वाले क्षेत्रों में विरोध हुआ था। लोगों का कहना था कि जब निगम उन्हें सुविधाएं ही नहीं दे रहा है तब टैक्स वसूले जाने का कोई औचित्य ही नहीं है।
इसके बाद व्यापार मंडल के साथ हुई बैठक में टैक्स वृद्धि पर उस समय विराम लग गया था जब मेयर प्रतिनिधि ललित मोहन अग्रवाल ने टैक्स नहीं बढ़ाने का वादा किया। इसके बाद निगम के अधिकारी भी बैकफुट पर आ गए और बिना टैक्स बढ़ाए गृहकर के बिल जारी कर दिए गए। तीन दिन पूर्व टैक्स वृद्धि के आदेश जारी कर दिए गए हैं।
इसे लेकर प्रांतीय उद्योग व्यापार मंडल उत्तराखंड के पदाधिकारी विरोध में आ गए हैं। प्रदेश संयोजक रामगोपाल कंसल और प्रदेश अध्यक्ष अजय गुप्ता, प्रदेश महामंत्री नवीन गुलाटी एवं अमित अग्रवाल व एडवोकेट संजय उपाध्याय ने कहा कि निगम ने वादाखिलाफी की है। गुपचुप तरीके से जनता पर टैक्स का बोझ बढ़ा दिया गया है।