शासन ने गन्ना समितियों को 12 करोड़ का विकास कमीशन जारी कर दिया है। इससे गन्ना समितियों की आर्थिक स्थिति में कुछ सुधार होगा। विकास कमीशन न मिलने से गन्ना समितियां का खस्ताहाल थीं। वहीं, गन्ना समितियों के कर्मचारियों को वेतन के लिए धरना-प्रदर्शन करने पड़ रहे थे।
किसान अपना गन्ना, गन्ना समितियों के माध्यम से शुगर मिलों को बेचते हैं। इस पर शुगर मिलें करीब दो प्रतिशत विकास कमीशन गन्ना समितियों को दिया जाता है। इस विकास कमीशन के रुपये से गन्ना समिति अपने कर्मचारियों का वेतन और अन्य खर्च का वहन करती है। ज्ञात हो कि सत्र 2012-13 के बाद शुगर मिलों की ओर से न के बराबर विकास कमीशन जारी किया जा रहा है। कभी-कभी नाममात्र विकास कमीशन जारी किया जाता है, जिससे गन्ना समितियों का खर्च चलना बेहद मुश्किल हो रहा है। वहीं, शुगर मिलें दावा करती हैं कि चीनी के दामों के कम होने के कारण शुगर मिल घाटे में हैं। जिस कारण शुगर मिल विकास कमीशन देने में समर्थ नहीं है। शुगर मिलों की स्थिति को ध्यान में रखते हुए तत्कालीन मुख्यमंत्री हरीश रावत ने अपने कार्यकाल के दौरान घोषणा की थी कि शुगर मिलों को राहत देने के लिए दो साल का विकास कमीशन प्रदेश सरकार की ओर से दिया जाएगा। घोषणा के बाद विकास कमीशन शासन में अटका था। जिसके बाद अब शासन की ओर से हरिद्वार की चारों गन्ना समितियों को 12 करोड़ का विकास कमीशन जारी कर दिया गया है, जो गन्ना समितियों के लिए संजीवनी बूटी का काम करेंगे।
शासन ने विकास कमीशन का 12 करोड़ रुपये जारी कर दिया है, जो गन्ना समितियों को भेज दिया गया है।
-शैलेंद्र सिंह, सहायक गन्ना आयुक्त, हरिद्वार