हरिद्वार जिले में पिछले वर्ष गन्ने की फसल का रकबा घटा है। गन्ना विभाग के आंकड़ों के अनुसार दो साल पहले जिले में गन्ने का रकबा 64007 हेक्टेयर था जो पिछले वर्ष घटकर 63,295 हेक्टेयर रह गया है।
गन्ना विभाग की ओर से प्रत्येक वर्ष एक मई से 30 जून के बीच गन्ना फसलों का सर्वे कराया जाता है। इस दौरान गन्ना विभाग और मिल कर्मचारियों की ओर से अपने-अपने क्षेत्रों में जाकर खेतों का निरीक्षण कर फसल का वास्तविक आंकलन करते हैं। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि 2026-2027 का सर्वे कार्य जारी है और अंतिम रिपोर्ट तैयार होने के बाद रकबे की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
हालांकि प्रारंभिक निरीक्षण में कई क्षेत्रों में किसानों की ओर से गन्ने के स्थान पर अन्य फसलों को प्राथमिकता देने की बात सामने आई है। किसानों का कहना है कि खेती की बढ़ती लागत और मौसम का सटीक पूर्वानुमान लगाना संभव नहीं होने के कारण गन्ने के रकबे में कमी आती है।
भगवानपुर क्षेत्र के किसान राजेंद्र सिंह ने बताया कि गन्ने की खेती में सिंचाई, मजदूरी और उर्वरकों पर अधिक खर्च आता है। इसके कारण कुछ किसानों ने इस बार गेहूं और अन्य फसलों की ओर रुख किया है। लक्सर क्षेत्र के किसान सुरेंद्र कुमार का कहना है कि गन्ना किसानों की प्रमुख नकदी फसल है लेकिन भुगतान में देरी और उत्पादन लागत बढ़ने से किसानों का रुझान प्रभावित हुआ है। उन्होंने कहा कि यदि किसानों को समय पर भुगतान और बेहतर सुविधाएं मिले तो गन्ने का रकबा फिर बढ़ सकता है।
गन्ना विभाग के आंकड़ों के मुताबिक
2021-2022-59102 हेक्टेयर
2022-2023-60576 हेक्टेयर
2023-2024 -66225 हेक्टेयर
2024-2025 -64007 हेक्टेयर
2025-2026 -63295 हेक्टेयर