भ्ाय के चलते पाोलियाो बूथ्ा पर भ्ाी नहीं अा रहे बच्चेे।
- फोटो : अमर उजाला ब्यूूराो
लंढौरा। बवाल को तीन दिन बीत चुके हैं। जो हुआ उसे कोई भी सही नहीं ठहरा रहा है। अफसरों ने जैसे-तैसे कानून व्यवस्था को संभाला। अब रोजमर्रा की जिंदगी को पटरी पर लौटाना बड़ी चुनौती है। कस्बे के लोग चाहते हैं कि जल्द पहले जैसा हो जाए। लेकिन इसके लिए पहल कौन करे। ये सवाल सबके मन में कौंध रहा है।
लंढौरा में बुधवार को जैसे ही भीड़ बढ़नी शुरू हुई वैसे ही दुकानों के शटर गिरने शुरू हो गए। इसके बाद बृहस्पतिवार और फिर शुक्रवार को बाजार पूरी तरह बंद रहे। सड़कों पर सन्नाटा पसरा रहा। लोग सिर्फ जरूरी काम काज से घरों से बाहर निकले। चप्पे चप्पे पर तैनात पुलिस फोर्स को देखकर लोगों को बार बार बवाल की याद आ रही है। करीब 20 हजार की आबादी वाले कस्बे में दैनिक रूप से इस्तेमाल होने वाले किराना, सब्जी, मेडिकल आदि बंद हैं। वहीं बैंक व स्कूलों पर भी ताला लटका है।
जाहिर सी बात है कि कस्बे में रहने वाले हर जाति समुदाय के लोगों को बराबर परेशानी उठानी पड़ रही है। व्यापारियों का एक बड़ा तबका बाजार खोलने का इच्छुक है, लेकिन कहीं न कहीं असुरक्षा की भावना बनी हुई है। इस डर को दूर करना अफसरों की अगली चुनौती है। वहीं आईजी संजय गुंज्याल का कहना है कि इस बारे में व्यापार मंडल के जिम्मेदार लोगों से बातचीत की गई है। उम्मीद है कि शनिवार को कस्बे का बाजार जरूर खुलेगा।
दुकानें बंद कराने की भी तैयारी
चैंपियन के कुछ समर्थक जल्द बाजार खुलने के पक्ष में नहीं हैं। शुक्रवार को रंगमहल में कुछ समर्थक इस पर चर्चा करते दिखे। उनका कहना था कि चैंपियन के लंढौरा आने तक समुदाय के लोग दुकानें नहीं खोलेंगे। जो दुकान खोलेगा बंद कराई जाएगी। एसएसी राजीव स्वरूप का कहना है कि दुकान खोलना या बंद करना अपना फैसला है। दुकान खोलने या बंद करने के लिए किसी को बाध्य नहीं किया जा सकता। माहौल बिगाडने वालों के खिलाफ रासुका के तहत कार्रवाई की जाएगी।