सिविल अस्पताल में चिकित्सकों की कमी के कारण स्वास्थ्य सेवाओं पर दबाव बढ़ता जा रहा है। अस्पताल की इमरजेंसी में सेवाओं को संचालित रखने के लिए विशेषज्ञ चिकित्सकों की ड्यूटी लगाई जा रही है। इसके कारण विशेषज्ञ डॉक्टरों को इमरजेंसी में आने वाले मरीजों को देखने के साथ ही अपनी ओपीडी की जिम्मेदारी भी संभालनी पड़ रही है। इससे अस्पताल पहुंचने वाले मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
सिविल अस्पताल में रोजाना सैकड़ों की संख्या में मरीज उपचार के लिए पहुंचते हैं। अस्पताल में चिकित्सकों की कमी के होने से ईएनटी, सर्जन, बाल रोग विशेषज्ञ समेत अन्य विशेषज्ञों चिकित्सकों को ओपीडी के साथ इमरजेंसी भी संभालनी पड़ रही है। शनिवार को ओपीडी से ईएनटी डॉ़ अनुभव अग्रवाल और बाल रोग विशेषज्ञ डॉ़ अर्चिता जैन की ड्यूटी इमरजेंसी में लगा दी गई थी।
इमरजेंसी में दोनों चिकित्सकों की ड्यूटी लगी होने से मरीजों को ओपीडी में भटकना पड़ा। कुछ मरीजों को जानकारी होने पर वह इमरजेंसी में चिकित्सक के पास उपचार के लिए पहुंचे मगर कई मरीज ओपीडी में चिकित्सक के न होने से निराश होकर लौट गए। मरीज के तीमारदार संदीप ने बताया कि उपचार के लिए अस्पताल पहुंचने के बाद उन्हें ओपीडी में भटकना पड़ा। बाद में पता चला कि कानों के डॉक्टर इमरजेंसी में बैठे हैं। वहीं डॉक्टरों की कमी होने से मौजूद चिकित्सकों पर भी काम का अतिरिक्त दबाव बढ़ गया है। विशेषज्ञ डॉक्टरों को ओपीडी के अलावा इमरजेंसी सेवाओं की जिम्मेदारी भी संभालनी पड़ रही है।
अस्पताल में चिकित्सकों की कमी बनी हुई है। इस संबंध में उच्च अधिकारियों को अवगत कराया गया है। चिकित्सकों की मांग के लिए सीएमओ को पत्र भी भेजा गया है। -डॉ़ एके मिश्रा, सीएमएस, सिविल अस्पताल