रुड़की। इस समय सावन चल रहा है और तीज का त्योहार सावन के महीने का प्रमुख त्योहार है। विवाहित महिलाओं के लिए यह त्योहार खास मायने रखता है। सुहागिन महिलाएं जहां इस त्योहार का बेसब्री से इंतजार करती हैं, वहीं यह त्योहार भाई बहनों के लिए भी बड़ा खास होता है।
भारतीय परंपरा के अनुसार हिंदू धर्म में तीज पर्व पर बहन के यहां सिंघारे लेकर जाने की परंपरा है, जिसमें भाई अपनी बहनों के यहां उपहार लेकर जाते हैं। इनमें कपड़े, मिठाइयां, श्रृंगार का सामान, नगद धनराशि के अलावा अपनी क्षमता के अनुसार अन्य उपहार भी शामिल होते हैं। यह सिलसिला तीज के त्योहार से करीब एक सप्ताह पहले शुरू हो जाता है। बुधवार को तीज त्योहार मनाया जाना है। इससे पहले ही बहनों के यहां सिंघारे लेकर जाने का सिलसिला शुरू हो चुका है। शहरों की अपेक्षा यह परंपरा ग्रामीण क्षेत्रों में ज्यादा है। रुड़की और उससे सटे आसपास के ग्रामीण इलाकों लक्सर, खानपुर, सुल्तानपुर, मंगलौर, नारसन भगवानपुर, पिरान कलियर और झबरेड़ा आ िगांव में इन दिनों सिंधारों की महक भाई बहन के रिश्तों में और ज्यादा मिठास घोल रही है। ग्राम आन्नेकी निवासी पूर्व जिला पंचायत सदस्य राजपाल सिंह का कहना है कि सिंधारे भारतीय संस्कृति के पुरानी परंपरा हैं। ग्राम साबतवाली निवासी हाकम सिंह भी सिंघारों की परंपरा को बहुत भावनात्मक परंपरा बताते हुए कहते हैं कि रिश्तों को संजोकर रखने में इस तरह की परंपराएं अहम भूमिका निभाती हैं।
घर में बना रहे हैं पकवान
लक्सर। सावन में बेटी की ससुराल सिंधारा जाने की पुरानी परंपरा चली आ है। गुजरे जमाने में सिंधारे में ले जाने के लिए मिठाइयां घर की महिलाएं उत्साह के साथ खुद ही बनाती थीं। मौजूदा समय में इस व्यवस्था पर बाजार पूरी तरह से हावी हो गया था। इस बार कोरोना महामारी के चलते महिलाओं ने फिर से कमान संभाल ली है। कोरोना काल के चलते ही इस बार महिलाएं घर पर ही मिठाइयां बना रही हैं।