रुड़की। रुड़की और हरिद्वार शहर के मास्टर प्लान में विकसित होने वाले नए क्षेत्रों में 43 मीटर चौड़ी सड़कें होंगी। साथ ही दोनों शहरों और इसके आसपास के प्रत्येक क्षेत्र आवासीय एवं व्यावसायिक उपयोग के लिए नोटिफाइड हाेंगे। यानी मास्टर प्लान लागू होते ही आवासीय क्षेत्र में किसी प्रकार की व्यावसायिक गतिविधि संचालित नहीं हो सकेगी। न ही नक्शे पास हो सकेंगे। हालांकि एचआरडीए की बोर्ड बैठक में मास्टर प्लान पर मुहर लग चुकी है। लेकिन एक जुलाई को नक्शा सार्वजनिक होने के बाद 2041 के लिए रुड़की-हरिद्वार शहर की तस्वीर साफ होगी। इसी के साथ नक्शे पर आम शहरियों की आपत्ति और सुझाव मांगे जाएंगे। इसके बाद धरातल पर काम शुरू होगा।
बता दें कि टाउन प्लानिंग विभाग देहरादून की ओर से हरिद्वार और रुड़की के मास्टर प्लान -2041 काम करीब-करीब पूरा कर लिया गया है। एक दिन पहले एचआरडीए की बोर्ड बैठक में इस प्लान को कुछ सुझावों के साथ पास कर दिया गया। अब मास्टर प्लान के तहत तैयार किए गए नक्शे को एक जुलाई को सार्वजनिक किया जाएगा। इसके बाद उम्मीद जताई जा रही है कि बड़ी संख्या में लोग आपत्तियां और सुझाव दर्ज कराएंगे। जिनकी सुनवाई रुड़की और हरिद्वार तहसील में होगी। बताया गया है नक्शे में दोनों शहरों के क्षेत्रों को अलग-अलग सुविधाओं के हिसाब से नोटिफाइड किया जाएगा। जिसमें व्यावसायिक एवं आवासीय जोन निर्धारित होंगे। खास बात यह होगी कि नक्शे में यह भी दर्शाया जाएगा कि इन जगहों पर स्कूल, पेट्रोल पंप, रोडवेज बस अड्डा, मेडिकल सुविधाएं, रिंग रोड, हरित जोन आदि सुविधाएं होंगी। आपत्तियों पर निराकरण के बाद अंतिम रूप से तैयार होने वाले मास्टर प्लान को एचआरडीए को सौंपा जाएगा। जिसके इसके क्रियान्वयन पर काम शुरू होगा। एचआरडीए के एई डीएस रावत ने बताया कि टाउन प्लानिंग डिपार्टमेंट नक्शे की सभी प्रक्रिया पूरी करने के बाद विभाग को सौंपेगा। इसके बाद एचआरडीए उसे लागू करेगा। एक जुलाई से आपत्तियों की सुनवाई शुरू हो जाएंगी। आपत्तियों के निस्तारण के बाद आगे का काम शुरू होगा।
नए क्षेत्रों में विकास की ज्यादा संभावना
2041 के सुनियोजित शहर की योजना के तहत नए क्षेत्रों में सुव्यवस्थित विकास की ज्यादा संभावनाएं होंगी। पुराने शहर में कुछ भी नया विकसित करने के लिए जगह नहीं है। घर और दुकानें पहले से ही घनी आबादी की तरह बसी हैं। ऐसे में प्लान में बाहरी क्षेत्राें के विकास पर जोर दिया गया है।
ग्रीन जोन में गिरेंगे जमीनों के दाम, बढ़ सकते हैं अवैध निर्माण के मामले
जानकारों की माने तो जिन क्षेत्रों को ग्रीन जोन में नोटिफाई किया जाएगा। वहां की खेती के दाम भी कम हो जाएंगे। जिससे गुपचुप तरीके से अवैध निर्माण के मामले बढ़ेंगे। ऐसे में एचआरडीए के सामने अवैध निर्माण के साथ ही नए विकास कार्य का बोझ बढ़ेगा।