क्षेत्र में बृहस्पतिवार सुबह तेज हवा के साथ हुई भारी बारिश में खेतों में पककर तैयार खड़ी धान और गन्ने की फसल तेज हवा के कारण जमीन पर बिछ गई। इससे फसलों को भारी नुकसान हुआ है। वहीं, खेतों में जलभराव होने से आगामी दिनों में होने वाली दलहन और तिलहन की बुआई भी प्रभावित होने की चिंता सताने लगी है। नवंबर में होने वाली गेहूं की अगेती बुआई पर भी बेमौसम बारिश का असर पड़ने की आशंका है।
बृहस्पतिवार सुबह करीब आठ बजे अचानक आसमान में घने बादल छा गए। देखते ही देखते पूरे क्षेत्र में अंधेरा छा गया और तेज हवा के साथ मूसलाधार बारिश शुरू हो गई। बारिश और हवा के कारण खेतों में खड़ी धान व गन्ने की फसल जमीन पर गिर गई।
किसानों का कहना है कि धान की फसल पककर तैयार हो चुकी थी और अब कटाई शुरू होने वाली थी लेकिन बेमौसम बारिश ने उनकी उम्मीदों पर पानी फेर दिया। किसान श्याम सिंह, राजपाल सैनी, रकम सिंह, जितेंद्र सिंह, हरपाल सिंह, यामीन, दिलशाद अली, शौकीन और तस्लीम का कहना है कि इस बार मौसम की मार ने उनकी चिंता बढ़ा दी है।
9 अक्तूबर को तेज तूफान और भारी ओलावृष्टि से फसलों को नुकसान पहुंचा था। इसके बाद 11 अक्तूबर को तेज हवा के साथ हुई बारिश ने भी फसलों को प्रभावित किया। अब बृहस्पतिवार सुबह हुई भारी बारिश ने बची-खुची फसल को भी नुकसान पहुंचाया है। किसानों ने बताया कि धान की फसल पूरी तरह पक चुकी थी और कटाई की तैयारी चल रही थी।
ऐसे समय में तेज हवा और बारिश से फसल गिरने के कारण कटाई में परेशानी आएगी व उत्पादन पर भी असर पड़ सकता है। गन्ने की फसल गिरने से भी किसानों को नुकसान होने की आशंका है। किसानों का कहना है कि वे खेती पर ही निर्भर हैं। यदि फसल की पैदावार प्रभावित हुई तो इसका सीधा असर उनके परिवारों के भरण-पोषण पर पड़ेगा।
जलभराव से अगली फसलों की बुआई पर भी संकट
किसानों के मुताबिक बारिश का असर केवल धान और गन्ने तक सीमित नहीं है। खेतों में पानी भरने से दलहन और तिलहन की फसलों की बुआई में देरी हो सकती है। वहीं, नवंबर में गेहूं की अगेती बुआई के लिए खेत तैयार करने में भी परेशानी आने की आशंका है। बारिश के कारण खेती का पूरा कार्यक्रम प्रभावित होने की चिंता किसानों को सता रही है। किसानों ने मौसम की मार से हुए नुकसान को लेकर चिंता जताई है।