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बाउल और पुंग संकीर्तन में बिखरी भक्ति रस की छटा

Wed, 16 Dec 2015 12:00 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, रुड़की
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रुड़की। आईआईटी के स्पिक मैके कार्यक्रम में बुधवार को बंगाल से मणिपुर तक की संस्कृति एक साथ दिखी । इस दौरान प्रख्यात शास्त्रीय कलाकार विदूषी पार्वती बाउल ने हाथ में इक तारा और तबला लेकर भक्ति में डूबकर नृत्य के साथ वाद्य और गायन की कला को भी अभिव्यक्त किया। वहीं मणिपुर के गुरु एस थनिल सिंह ने ढोलक की थाप पर वादन और नृत्य की अनूठी प्रस्तुति दी। सभी प्रस्तुतियों में चैतन्य महाप्रभु से प्रेरित भक्ति की छाप साफ तौर पर दिखी।
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स्पिक मैके के अंतर्गत आयोजित कार्यक्रम के तीसरे दिन विभिन्न गतिविधियों का आयोजन किया गया। दीक्षांत भवन में आयोजित कार्यक्रम के दौरान भक्ति रस में डूबी बाउल संस्कृति को विदूषी पार्वती बाउल ने जीवंत किया। इस दौरान उन्होंने चैतन्य महाप्रभु की भक्ति रस धारा को हाथ में इकतारा लेकर गायन और नृत्य के साथ प्रस्तुत किया। उनकी प्रस्तुति के भाव थे कि लक्ष्य की भावना से ही भक्त राह पर निकलता है। इस राह में आने वाली कठिनाई के कारण दुख और करुणा में डूबकर ही भगवान के साक्षात्कार होते हैं। पार्वती बाउल की प्रस्तुति के दौरान दर्शकों ने तालियों से आभार व्यक्त किया। इसके बाद मणिपुर के प्रसिद्ध पुंग चोलम वादन नृत्य की प्रस्तुति हुई। गुरु एस थनिल सिंह के ग्रुप ने मंच पर ढोलक के वादन और नृत्य के साथ प्रस्तुति दी। इस दौरान कलाकारों की कदमताल और उसकी लय के साथ एकरस में ढोलक पर पड़ती थाप ने सभी को आश्चर्यचकित कर दिया। बीच-बीच में शंख की ध्वनि ने माहौल को सात्विक रंग दिया। सफेद पगड़ी, पारंपरिक धोती और दुपट्टे में कलाकारों ने वादन और नृत्य के साथ अनोखी भाव भंगिमाओं से सभी का मन मोह लिया।

भरतनाट्यम में दिखी श्रीकृष्ण राधा के प्रेम की पराकाष्ठा
प्रसिद्ध कलाकार दीपा राघवन ने दी शानदार प्रस्तुति
रुड़की। भरत नाट्यम विधा की मशहूर कलाकार दीपा राघवन की प्रस्तुति ने दर्शकों का दिल जीत लिया। उन्होंने अपनी प्रस्तुति की शुरुआत अष्टपदी और इसके बाद तेलाना यानी नृत्यगान से की। इस दौरान उन्होंने नृत्य के जरिए भगवान श्री कृष्ण और राधा के बीच अनन्य प्रेम को प्रदर्शित किया। यह नृत्य उस समय पर आधारित था जब राधा भगवान को ढूंढती है और भगवान गोपियों के साथ रास में डूबे हुए थे। तब राधा के मन की क्या व्यथा थी इसे विभिन्न अलंकारों और भाव भंगिमाओं और विभिन्न मुद्राओं के जरिए प्रस्तुत किया गया। इस दौरान उन्होंने कमल के फूल और मृग की चंचलता सहित कई उपमाओं का उदाहरण प्रस्तुत करते हुए  नृत्य की गहराइयों को छुआ। उनके नृत्य से दर्शक मंत्रमुग्ध नजर आए।
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