रुड़की। सरकार एवं कृषि विभाग के अधिकारियों के आग्रह पर क्षेत्र के किसानों ने धान की फसल का बीमा तो करवा लिया था, लेकिन अब बीमा कंपनी यह कह कर क्लेम देने से इनकार कर रही है कि फसल नष्ट होने के बाद बीमा किया गया था। कंपनी के इस फरमान से सवाल उठ रहा है कि जब फसल नष्ट हो गई थी तो कंपनी ने बीमा किया ही क्यों।
प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत किसानों को धान की फसल का बीमा करवाने के लिए खूब प्रचार-प्रसार किया था। कृषि अधिकारियों ने गांव-गांव जाकर किसानों को बीमा के लाभ गिनाए थे। इससे प्रेरित होकर जिले के हजारों किसानों ने धान की फसल का बीमा कराया था। इसके तहत किसानों ने 4166 रुपये बीमा के लिए दो प्रतिशत के हिसाब से करीब 84 रुपये प्रति बीघा प्रीमियम शुल्क जमा किया था।
जुलाई के अंत एवं अगस्त में बारिश की वजह से सोलानी एवं पथरी की बरसाती नदियों में आई बाढ़ के पानी से लक्सर एवं खानपुर ब्लॉक क्षेत्र की हजारों बीघा धान की फसल बर्बाद हो गई थी। क्षेत्र के किसानों ने क्लेम के लिए बीमा कंपनी से सर्वे करवाने की मांग की थी। कंपनी अधिकारी किसानों के पास पहुंचे। लेकिन कंपनी ने किसानों को क्लेम न देकर नोटिस भेज दिए। इसमें कहा गया कि बीमा, फसल नष्ट होने के बाद किया गया है। इसलिए कंपनी आपके दावे पर विचार करने में असमर्थ है।
इन गांवों के किसानों ने किया था क्लेम का दावा
लक्सर एवं खानपुर ब्लॉक क्षेत्र के कुआंखेड़ा, ढाढेंकी, पंडितपुरी, गंगदासपुर, खानपुर, लालचंदवाला, तुगलपुर, शाहपुर आदि गांवों के काश्तकारों ने बीमा क्लेम का दावा किया था। किसानों ने फसल नष्ट होते ही कंपनी को प्रार्थना पत्र दे दिया था। लेकिन अब क्लेम देने से इनकार करने पर किसान परेशान हैं।
ब्लैंक कागज पर साइन कराने का आरोप
किसान कल्पना देवी, कालूराम, कुशलपाल सिंह, विकास कुमार, नकली सिंह, गौतम सिंह आदि का आरोप है कि जिस समय कंपनी अधिकारी सर्वे करने आए थे तो उन्होंने हलका पटवारी एवं कृषि प्रतिनिधियों के साथ मिलकर किसानों के ब्लैंक कागज पर हस्ताक्षर कराए थे। इस दौरान कंपनी अधिकारियों ने आश्वासन दिया था कि वह सर्वे रिपोर्ट भरकर दिल्ली भेजेंगे। उसके बाद क्लेम दिया जाएगा। लेकिन अब क्लेम की बजाय उन्हें नोटिस भेज दिए गए हैं।
इनका कहना है
मामला मेरे संज्ञान में नहीं आया है। मैं मामले की जांच पड़ताल करूंगा। जांच के बाद किसानों को कंपनी अधिकारियों से बात कर क्लेम दिलवाने के लिए प्रयास किए जाएंगे।
जेपी तिवारी, मुख्य कृषि अधिकारी, हरिद्वार
कंपनी मनमानी कर रही है। ऐसे में सरकार को बीमा राशि देनी चाहिए। नहीं दिया तो भाकियू सड़क पर उतरकर आंदोलन करेगी।
जयपाल सिंह फौजी, जिला उपाध्यक्ष, भाकियू