शहर में पांच दिनी पर्व का तीसरा दिन लोहड़ी के त्यौहार के रूप में मनाया गया। सायंकाल शहर के कई चौराहों और कालोनियों में धूमधाम से लोहड़ी जलाई गई। मकई, मूंगफली, तिल और गुड़ वितरित कर लोगों ने एक-दूसरे को लोहड़ी की बधाई दी। देर रात तक लोग लोहड़ी के इर्द गिर्द नाचते गाते रहे।
लोहड़ी का पर्व वास्तव में सूर्य कैलेंडर के अनुसार वर्ष का आखिरी पर्व है। देश में सूर्य और चंद्र दो कैलेंडर प्रचलित है। अधिकांश पर्व चंद्र कैलेंडर के अनुसार मनाए जाते हैं। लोहड़ी का पर्व सूर्य और संक्रांति से जुड़ा हुआ है। सौर कैलेंडर तब प्रारंभ होता है जब सूर्य धनु राशि छोड़कर मकर राशि में प्रवेश करें। सूर्य के मकरस्थ होने की पूर्व बेला में भगवान सूर्य का ताप बढ़ाने के लिए जगह जगह अग्नि प्रवज्ज्लन होता है। लोहड़ी के दिन प्रात:काल से ही शहर में उत्साह का माहौल था। नगर के अनेक चौराहों पर लोहड़ी जलाई गई। शहर के रामनगर, सिविल लाइंस, अंबर तालाब एवं आवास विकास आदि सहित विभिन्न मोहल्लों में लोहड़ी पर्व मनाया गया। ढोल बाजों के साथ लोहड़ी जली। युवकों ने ढोल की थाप पर नृत्य भी किया।