रुड़की। बीएसएम इंटर कॉलेज में पंडित गोविंद बल्लभ पंत की जयंती पर आयोजित कार्यक्रम में वक्ताओं ने उनके आदर्शों पर चलने का आह्वान किया। साथ ही कहा कि अल्मोड़ा में जन्मे पंत को पहाड़ी इलाकों को देश के राजनीतिक मानचित्र पर जगह दिलाने का श्रेय जाता है।
शुक्रवार को कॉलेज में आयोजित कार्यक्रम में विद्यालय के प्रबंधक एवं पूर्व दर्जाधारी मनोहर लाल शर्मा एडवोकेट ने कहा कि भारत रत्न पंडित गोविंद बल्लभ पंत के बलिदान को सदैव याद रखा जाएगा। 10 सितंबर 1887 को उत्तराखंड के अल्मोड़ा स्थित खूंट गांव में जन्मे पंत ने वर्ष 1905 में इलाहाबाद विश्वविद्यालय में प्रवेश लिया और 1909 में कानून की परीक्षा उत्तीर्ण की। काकोरी मुकदमे ने एक वकील के तौर पर उन्हें पहचान और प्रतिष्ठा दिलाई। उत्तर प्रदेश के पहले मुख्यमंत्री और भारत रत्न गोविंद बल्लभ पंत को राजनीतिक रूप से पिछड़े माने जाने वाले पहाड़ी इलाकों को देश के राजनीतिक मानचित्र पर जगह दिलाने का श्रेय भी जाता है। प्रधानाचार्य अरुण कुमार सिंह ने कहा कि वे महात्मा गांधी के जीवन दर्शन को देश की जनशक्ति में आत्मिक ऊर्जा का स्त्रोत मानते रहे। उन्होंने देश के राजनेताओं का ध्यान अपनी पारदर्शी कार्यशैली से आकर्षित किया।
भारत के गृहमंत्री के रूप में वे आज भी प्रशासकों के आदर्श हैं। कैप्टन अजय कौशिक, डॉ. अभय ढौंडियाल, अखिलेश मोहन शर्मा, अमित कपिल, डॉ. उदयन, प्रमोद कुमार शर्मा, संगीता गौड़, मनोज कुमार, विनय कुमार, मोहित कुमार ने भी विचार व्यक्त किए। वहीं, श्री मारवाड़ कन्या पाठशाला इंटर कॉलेज, रुड़की छावनी में पंत की जयंती पर माल्यार्पण कर श्रद्धांजलि दी गई। प्रधानाचार्य भारती अग्रवाल और अनु शर्मा ने पंत के जीवन पर प्रकाश डालते हुए उनके सामाजिक एवं स्वतंत्रता संग्राम आंदोलन की जानकारी दी। मौके पर श्रद्धा, मुन्नी देवी, कामनी गुप्ता, निधि शर्मा, अमित रस्तोगी, बबीता त्यागी, रश्मि गुप्ता, प्रिया अग्रवाल, वंदना शर्मा, अर्चना अग्रवाल आदि ने भी विचार रखे। कार्यक्रम में डिंपल त्यागी, गायत्री शर्मा, संगीता सिरोही मौजूद रहे।
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उल्लेखनीय कार्य करने वाले सम्मानित
पंडित गोविंद बल्लभ पंत पर्यावरण सुरक्षा समिति ने आयोजित किया कार्यक्रम
संवाद न्यूज एजेंसी
रुड़की। पंडित गोविंद बल्लभ पंत पर्यावरण सुरक्षा समिति की ओर से पंत की जयंती पर शिक्षकों समेत विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय कार्य करने वालों को सम्मानित किया गया।
शुक्रवार को सत्यनारायण मंदिर परिसर स्थित धर्मशाला में आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए संस्था के महासचिव प्रभकर पंत ने कहा कि पंडितजी को उनके कार्यों के लिए हमेशा याद किया जाता रहेगा। उन्होंने शिक्षकों को सम्मानित करते हुए कहा कि शिक्षक हमेशा समाज के लिए मार्गदर्शक का काम करता है। सेवानिवृत्त होने पर भी शिक्षक सामाजिक कार्यों के दायित्व से मुक्त नहीं होता। इस दौरान विभिन्न क्षेत्रों में काम कर रहे लोगों को सम्मानित किया गया। सम्मानित होने वालों में संस्था संरक्षक प्रो. स्वर्णलता मिश्रा, प्राचार्य प्रो. डीएस नेगी, डॉ. तीर्थ प्रकाश, डॉ. दीपा शर्मा, इंजीनियर प्रकाश चंद, इंजीनियर डीएस रावत, पार्वती पांडे, डॉ. रश्मि जिंदल, ललिता पंवार, अनु शर्मा, गौरव कुमार, सतनाम सिंह, सुशील पुंडीर, भूपेंद्र, अंकुश सोनी, अमनदीप, बलदेव राज, दिपेश भारद्वाज, अंकित पाल के अलावा टॉपर छात्रों में पावनी शर्मा, पीयूषा, मंजरी पंत, सृष्टि गुप्ता, अमृता, सांस्कृतिक प्रस्तुति के लिए प्रिया, मुक्ति, महक गौरी, नेहा, योगिता, निहारिका, आकांक्षा, महिमा, मानवी, मयंक आदि शामिल थे।
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बल्लभ पंत के जीवन से लें प्रेरणा
खानपुर। नेशनल कन्या इंटर कॉलेज में पंडित गोविंद बल्लभ पंत की जयंती मनाई गई। प्रधानाचार्य घनश्याम गुप्ता ने कहा कि पंत एक राजनीतिज्ञ ही नहीं बल्कि समर्पित स्वतंत्रता सेनानी भी थे। उत्तर प्रदेश के प्रथम मुख्यमंत्री के रूप में उन्हें हमेशा याद किया जाता रहेगा। उन्होंने छात्रों से भारत रत्न से सम्मानित गोविंद बल्लभ पंत के जीवन से प्रेरणा लेने की अपील की। इस दौरान सुरेशचंद्र कवटियाल, प्रमोद शर्मा, रविंद्र कुमार, मुकेश कुमार, पंकज कुमार, अमित कुमार, विशाल कुमार मौजूद रहे। संवाद
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हर्षोल्लास से मनाई पंत की जयंती
सुल्तानपुर। शिक्षाराज इंटर कॉलेज में पंडित गोविंद बल्लभ पंत की जयंती हर्षोल्लास से मनाई गई। शुक्रवार को आयोजित कार्यक्रम में प्रधानाचार्य डॉ. दीपक कुमार शर्मा ने कहा कि पंडित गोविंद बल्लभ पंत का पूरा जीवन राष्ट्र को समर्पित रहा है। भारतीय संविधान में हिंदी को राष्ट्रभाषा का दर्जा दिलाने में उनका महत्वपूर्ण योगदान रहा। सभी को पंत के जीवन से प्रेरणा लेकर राष्ट्र के प्रति जीवन निर्वाह करना चाहिए। इस दौरान सहायक अध्यापक नीरज राम पारकी, सहायक अध्यापिका शानू भट्ट, वेद प्रकाश सैनी, जितेंद्र कुमार, विश्वास सैनी, अनूप कुमार, प्रियंका, सोमपाल, राजेश मौजूद रहे। संवाद