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किसानों ने रोका बाहरी गन्ना

Fri, 24 Feb 2017 10:45 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो नारसन
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चेतावनी के बावजूद शुगर मिल प्रबंधन की ओर से कोई कदम नहीं उठाए जाने पर गुस्साए किसानों ने मिल गेट पर पहुंचकर स्वयं ही बाहरी गन्ना रोक दिया। इससे बाहर से आए गन्ने से भरे वाहनों की करीब एक किलोमीटर लंबी लाइन लग गई। वहीं स्थानीय किसानों को गन्ना बेचने में राहत मिली।

लिब्बरहेड़ी स्थित उत्तम शुगर मिल में स्थानीय किसानों को दरकिनार कर बाहरी गन्ना खरीदा जा रहा है। इससे स्थानीय किसानों का नंबर 24-24 घंटे बाद आ रहा है। इससे किसानों का सारा समय गन्ना बेचने में ही गुजर रहा था। इससे नाराज अखिल भारतीय किसान यूनियन ने मिल प्रबंधन को बाहरी गन्ने पर रोक लगाने की मांग करते हुए चेतावनी दी थी। कहा था कि या तो मिल बाहरी गन्ने पर रोक लगाए या फिर स्थानीय किसानों को पहले गन्ना बेचने की सुविधा दे, लेकिन मिल की ओर से इस बारे में कोई कदम नहीं उठाया गया। इससे नाराज अखिल भारतीय किसान के प्रवक्ता राकेश लोहान, विपुल राठी, प्रभात, सुरेंद्र, बाबूराम और मंागेराम ने मिल गेट में पहुंचकर बाहरी गन्ने से भरी ट्रैक्टर-ट्रॉलियों को रोक लिया। किसानों का कहना था कि वह किसी भी सूरत में बाहरी गन्ने को मिल में अंदर नहीं जाने देंगे। इसको लेकर किसानों ने मिल गेट के बाहर ही हंगामा कर धरना शुरू कर दिया। मिल में बाहरी गन्ने की एंटी बंद होने से मंडावली से लेकर मिल तक करीब एक किलोमीटर ट्रैक्टर-ट्रॉलियों की लाइन लग गई। इससे मिल प्रबंधन के हाथ-पांव फूल गए। हालांकि  बाहरी गन्ने की खरीद पर रोक लगने से स्थानीय किसानों को गन्ना बेचने से राहत मिली।
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मिल प्रबंधन की बाहरी गन्ना खरीदने में कोई दिलचस्पी नहीं है। पहले स्थानीय किसानों का गन्ना खरीदा जाएगा। इसके बाद ही बाहरी गन्ना लाने वालों का नंबर आएगा। दस दिन पहले जरूर स्थानीय गन्ने की कमी थी। जिससे बाहरी गन्ना मंगाया जा रहा था, लेकिन अब आठ दिन पहले बाहरी किसानों को गन्ना लाने को मना कर दिया गया था, इसके बावजूद वह गन्ना लेकर आए हैं।
लोकेंद्र लांबा, उपमहाप्रबंधक, उत्तम शुगर मिल लिब्बरहेड़ी

गन्ना खरीद केंद्र बंद होने से किसान परेशान
सिविल लाइंस में हुई उत्तराखंड किसान मोर्चा की बैठक में केंद्रीय अध्यक्ष चौधरी गुलशन रोड़ ने कहा कि क्षेत्र के गन्ना केंद्र बंद पड़े होने से किसान परेशान हैं, लेकिन मिलों की ओर से बाहरी गन्ना धड़ाधड़ खरीदा जा रहा है। उन्होंने बंद पड़े केंद्रों को चलाने की मांग की।
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शुक्रवार को हुई बैठक में गुलशन रोड़ ने कहा कि शासन एवं प्रशासन भी किसानों की दुर्दशा का तमाशा देख रहा है। किसानों को न तो बाहरी गन्ने से निजात दिलाई जा रही है और न ही उन्हें भुगतान किया जा रहा है। इससे किसान का मोह गन्ने की फसल से फिरता जा रहा है। उन्होंने कहा कि किसानों की समस्याओं का जल्द हल नहीं होने पर किसान सड़कों पर उतरकर आंदोलन को मजबूर होंगे। राष्ट्रीय उपाध्यक्ष चौधरी राजेंद्र सिंह ने कहा कि एक तरफ तो सरकार किसानों का गन्ना भुगतान नहीं करा रही है, वहीं दूसरी तरफ ऊर्जा निगम के अधिकारी किसानों को बिजली कनेक्शन काटकर और परेशान कर रही है। उन्होंने कहा कि ऊर्जा निगम के कर्मचारी किसानों के बिजली कनेक्शन काटने की जुर्रत न करें, वरना किसान बिजली घरों पर ताले लगाने को मजबूर होंगे। बैठक में धर्मवीर, बृजपाल एवं प्रवेज अहमद, चौधरी सुरेंद्र, नरेश लोहान, धर्मेंद्र चौधरी, महकार सिंह, राजपाल सिंह, पप्पू भाटिया, वीरेंद्र सैनी, अब्दुल गनी, मोहम्मद आजम, मोहम्मद जाबिर, भूपेश शर्मा, मुंतजीर आदि मौजूद रहे।
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