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पोस्टमार्टम में देरी पर भड़के ग्रामीण

Fri, 24 Feb 2017 10:42 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो रुड़की
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फाटक के समीप बृहस्पतिवार को हुए सड़क हादसे में तीन बहनों समेत चार लोगों की मौत हो गई थी। चारों के शव रात को ही सिविल अस्पताल रुड़की पहुंचा दिए गए थे, लेकिन शुक्रवार दोपहर एक बजे तक भी पोस्टमार्टम न होने पर शोक में डूबे परिजन और ग्रामीण भड़क गए। इन्होंने पुलिस पर सहयोग न करने के आरोप जड़ दिए। मामला बढ़ता देख पुलिस के हाथ-पांव फूल गए, लेकिन अधिकारियों और मोअज्जिज लोगों के हस्तक्षेप पर ग्रामीणों शांत हो गए।

इकबालपुर रेलवे फाटक के समीप देर शाम सामान से भरा एक ट्रक ओवरटैक करते डीसीएम और एक अन्य गाड़ी पर पलट गया था। इसमें डीसीएम सवार जिला सहारनपुर, नागल थाना, सरकड़ी निवासी तीन बहनें (पूजा, सीता व सीमा) और खेड़ा मुगल निवासी उदय की दबने से मौके पर ही मौत हो गई थी। पुलिस ने रात को ही चारों शवों को पोस्टमार्टम के लिए सिविल अस्पताल भिजवाया था। चारों के परिजन और ग्रामीण भी रात को अस्पताल पहुंच गए थे। बताया कि पूरी रात परिजन और ग्रामीण मोर्चरी के बाहर रोते-बिलखते रहे। दिन निकलते ही बड़ी संख्या में अन्य ग्रामीण और इनके रिश्तेदार भी पहुंच गए। ग्रामीण बार-बार डाक्टरों से पोस्टमार्टम करने की गुहार लगा रहे थे।
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डाक्टरों का कहना था कि पुलिस ने अभी तक कागज तैयार कर उन्हें नहीं दिए हैं। उसके बाद परिजन और ग्रामीण पुलिस से जल्द कागज तैयार करने की मिन्नतें करते रहे। बावजूद इसके दोपहर करीब एक बजे ग्रामीणों के सब्र का बांध टूट गया। हादसे के 15-16 घंटे बाद पोस्टमार्टम के कागज तैयार न करने से ग्रामीण पुलिस पर भड़क गए। ग्रामीणों का कहना था कि हमदर्दी के बजाय पुलिस पोस्टमार्टम में देरी कर रही है। जबकि यह काम प्राथमिकता के साथ रात को ही पूरा कर दिया जाना चाहिए था। माहौल को देखते हुए पुलिस ने जैसे-तैसे ग्रामीणों को शांत कराया। दोपहर एक बजे के बाद पुलिस ने पीएम के कागज दिए। उसके बाद चिकित्सक ने पीएम किया।
इनसेट
छह बहनों का इकलौता भाई था उदय
रुड़की। हादसे में जिन चार लोगों की मौत हुई है उनमें खेड़ा मुगल निवासी उदय भी शामिल है। उदय की मौत से पूरा परिवार बेहाल है। वह छह बहनों का इकलौता भाई था। 20 वर्ष उदय ढाई माह पहले ही फैक्ट्री में नौकरी के लिए जाना शुरू किया था। इसकी तीन बड़ी और तीन उससे छोटी बहनें है। उदय के साथ उसकी छोटी बहन वर्षा और बड़ी बहन अंजू भी फैक्ट्री में नौकरी करती थी। भाई-बहन फैक्ट्री में नौकरी कर परिवार का पेट पाल रहे थे। तीनों भाई-बहन अकेले फैक्ट्री जाते थे लेकिन, बृहस्पतिवार को अंजू और वर्षा ने छुट्टी रखी। उदय ही अकेला फैक्ट्री गया था। उदय की मौत से पूरा परिवार बेहाल है।

मौत भी नहीं छुड़ा सकी तीनों बहनों का साथ
 सरकड़ी निवासी सोमदत्त की छह बेटियां और एक बेटा सोनू है। छह बेटियों में मांगी की शादी हो चुकी है। पूजा, सीता और सीमा तीनों फैक्ट्री में काम करती थी। जबकि छोटी बहनें काजल और निशा घर में रहती थी। पूजा, सीता और सीमा तीनों हमेशा एक साथ रहती थी। तीनों एक ही कंपनी में काम पर जाती थी। ग्रामीणों की मानें तीनों बहनों में जबरदस्त प्यार था। तीनों दोस्त की तरह रहती थी। ग्रामीणों का कहना है कि तीनों को मौत भी जुदा नहीं कर पाई है।
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श्रमिकों की बंधुवा मजदूरों जैसी हालत
 फैक्ट्री में ठेकेदार के अंडर काम करने वाले ज्यादातर श्रमिकों की हालत बंधुवा मजदूरों जैसी है। ठेकेदार ने श्रमिकों को रखा हुआ है। दिन निकलते ही डीसीएम एवं छोटा हाथी जैसे वाहनों द्वारा श्रमिकों को फैक्ट्री लाया जाता था। करीब 10-12 घंटे की नौकरी करने के बाद उन्हें वापस छोटा हाथी आदि से भेज दिया जाता था। हादसे के शिकार तीनों बहनें और उदय भी ऐसे ही श्रमिकों में से थे। श्रमिकों ने बताया कि सुबह छह बजे से गाड़ी आ जाती है और शाम को छह-सात बजे के बाद गाड़ी उन्हें फैक्ट्री लेकर छोड़ने जाती है। छोटा हाथी आदि में क्षमता से अधिक श्रमिकों को बैठाया जाता है।
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