रुड़की। उत्तराखंड विद्युत संविदा कर्मचारी संगठन-इंटक के स्थापना दिवस पर आयोजित सम्मेलन में पदाधिकारियों ने नियमितीकरण सहित 16 सूत्री मांगें जोरशोर से उठाई। इसके बाद इंटक के प्रदेश अध्यक्ष और विधायक हीरा सिंह बिष्ट ने मांगों की वकालत की, लेकिन मुख्यमंत्री ने सरकार की आर्थिक मजबूरियों का हवाला देते हुए हाथ खड़े कर दिए। साथ ही आर्थिक तंगी का हवाला देते हुए कहा कि ‘आप ही फार्मूला बताएं कि आपकी मांगों को हम कैसे पूरा करें’।
हरिद्वार रोड स्थित एक बैंक्वट हाल में आयोजित समारोह के दौरान पदाधिकारियों ने पांच साल से अधिक समय से नियमित सेवा करने वाले कर्मचारियों के नियमितीकरण की मांग जोरशोर से उठाई। मुख्यमंत्री हरीश रावत के पहुंचने से पहले पदाधिकारियों ने समान कार्य के लिए समान वेतन, महंगाई भत्ता सहित 16 सूत्री मांगों को लेकर खूब माहौल बनाया। उसके बाद मुख्यमंत्री के पहुंचने पर उनके समर्थन में इंटक के प्रदेश अध्यक्ष और डोईवाला विधायक हीरा सिंह बिष्ट ने भी वकालत की।
उन्होंने कहा कि हम सरकार के साथ हैं, लेकिन कर्मचारियों की मांगों पर धरना प्रदर्शन से पीछे नहीं हटेंगे। माहौल में सभी पदाधिकारी और कर्मचारी उम्मीद लगाए बैठे थे कि आज मुख्यमंत्री मंच से संविदाकर्मियों के लिए कोई बड़ी घोषणा करेंगे। अपने संबोधन के शुरुआत में मुख्यमंत्री हरीश रावत ने लोगों की उम्मीदों को और पंख लगाए लेकिन बाद में मजबूरियों का हवाला देते हुए उन्होंने संगठन की मांगों से किनारा कर दिया। उन्होंने कहा कि हमें खुशी है कि आज हमारे तीनों निगम लाभ में हैं। ट्रांसमिशन लास भी कम हुआ है।
हम उपभोक्ताओं को बेहतर बिजली आपूर्ति कर पा रहे हैं। उत्तराखंड में सकारात्मक ट्रेड यूनियन की आवश्यकता है जो कर्मचारियों की समस्याओं के साथ ही सरकार से भी तालमेल रख सके। उन्होंने कहा कि आपदा की मार से अभी प्रदेश उबर नहीं पाया है। उन्होंने कहा कि मेरा भी मन करता है कि मांगे पूरी कर दूं, लेकिन इसके लिए उनके पास संसाधनों का अभाव है। यदि हम मांगे मान लेते हैं तो कर्मचारियों के वेतन और सातवें वेतन आयोग की सिफारिशें लागू करने के लिए भारी कर्ज लेना पड़ेगा।
हीरा सिंह बिष्ट बड़े घाघ हैं ....
मुख्यमंत्री हरीश रावत ने अपने संबोधन में कहा कि तबियत खराब होने के बावजूद वह सम्मेलन में आने के लिए हीरा सिंह बिष्ट की बात को टाल नहीं सके। हीरा सिंह बिष्ट की ओर से संविदा कर्मचारियों की वकालत पर उन्होंने कहा कि हीरा सिंह बिष्ट बड़े घाघ आदमी हैं। पता नहीं इन्होंने कर्मचारियों और आंगनबाड़ी कर्मियों और भोजनमाताओं को कौन से घुट्टी पिला दी है।
मैं तो नरम हूं ...
सम्मेलन को संबोधित करने के बाद जब मुख्यमंत्री जाने लगे तो पत्रकारों ने उनसे पीडीएफ से चल रही खींचतान के संबंध में सवाल किया। पीडीएफ के सख्त रुख के सवाल पर उन्होंने कहा कि मै तो नरम हूं, सब ठीक हो जाएगा।