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एक स्कूल की मान्यता रद्द, एक अन्य स्कूल फ्री बांटेगा सील किताबें

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रुड़की। विद्यालयी शिक्षा मंत्री अरविंद पांडेय के आदेशों के बाद मनमानी करने वाले प्राइवेट स्कूलों पर नकेल कसती नजर आ रही है। मुख्य शिक्षाधिकारी ने अभिभावक पर फीस के लिए दबाव बनाने वाले स्कूल की मान्यता समाप्त कर दी है। इस स्कूल के संचालक पर अभिभावक के साथ मारपीट का भी आरोप था। दूसरी ओर, एक अन्य स्कूल में जब्त की गई महंगे पब्लिकेशन की किताबों को बच्चों में निशुल्क वितरित करने के आदेश जारी किए गए हैं। दोनों स्कूलों का पक्ष सुनने के बाद यह कार्रवाई की गई है।
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पिछले दिनों विद्यालयी शिक्षा मंत्री अरविंद पांडेय ने सभी शिक्षा अधिकारियों को आदेश जारी किए थे कि कोरोना काल को देखते हुए कोई भी प्राइवेट स्कूल फीस के लिए दबाव नहीं बना सकता है। साथ ही प्राइवेट स्कूल महंगे पब्लिकेशन की किताबें भी नहीं लगा सकते हैं। इसके बाद विभागीय अधिकारी हरकत में आ गए थे। विभागीय टीम ने मंगलौर के एक स्कूल में छापा मारकर महंगे पब्लिकेशन की किताबें बरामद की थीं। किताबों को सील कर स्कूल को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया था। स्कूल की ओर से शिक्षा विभाग के अधिकारियों को दिए गए नोटिस के जवाब में कहा गया है कि किताबें बच्चों को निशुल्क बांटने के लिए मंगाई गई थीं। मुख्य शिक्षाधिकारी ने खंड शिक्षाधिकारी, नारसन पूनम शर्मा के नेतृत्व में बच्चों को किताबों फ्री में बंटवाने के आदेश दिए हैं। इसके साथ ही पिछले दिनों खानपुर क्षेत्र से शिकायत आई थी कि चंद्रपुरी स्थित डॉ. भीमराव अंबेडकर जूनियर हाईस्कूल के संचालक ने फीस नहीं देने पर एक अभिभाव के साथ मारपीट की है। इस मामले में मुकदमा भी दर्ज हुआ था। वहीं, विभागीय जांच के बाद इस स्कूल की मान्यता समाप्त कर दी गई है।
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विभागीय जांच में फीस का दबाव बनाने और मारपीट की शिकायत सही पाए जाने पर खानपुर के डॉ. भीमराव अंबेडकर जूनियर हाईस्कूल की मान्यता समाप्त कर दी गई है। वहीं, मंगलौर के स्कूल ने फ्री बांटने के लिए किताबें मंगाए जाने का दावा किया। खंड शिक्षाधिकारी नारसन के नेतृत्व में किताबों के निशुल्क वितरण के आदेश दिए गए हैं।
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-डॉ. आनंद भारद्वाज, मुख्य शिक्षाधिकारी, हरिद्वार
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कार्रवाई से बचने को स्कूलों की पैंतरेबाजी
पिछले दिनों शिक्षा विभाग के अधिकारियों की टीम ने रुड़की के भी एक स्कूल में छापा मारकर महंगे पब्लिकेशन की किताबें पकड़ी थीं। किताबों को सील कर स्कूल प्रबंधन से जवाब तलब किया गया था। स्कूल प्रबंधन ने अपने जवाब में दावा किया था कि इन किताबों को फ्री बांटने के लिए मंगाया गया है। इसके बाद किताबों की कुर्बानी देकर स्कूल ने खुद को कार्रवाई से बचा लिया था। इसमें स्कूल प्रबंधन को कुछ नुकसान तो हुआ, लेकिन मान्यता बचाने में वे कामयाब हो गए थे। इसके बाद मंगलौर के स्कूल ने भी यही रास्ता अपनाया है। इसके बाद स्कूल की किताबों को निशुल्क बांटा जा रहा है।
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