प्रोसेस के तहत कोई भी व्यक्ति अपनी जमीन बेचने के लिए ऑनलाइन आवेदन करेगा, जिस पर अलग-अलग स्तर पर प्राधिकृत अधिकारी उसका वैरीफिकेशन करेंगे। संबंधित व्यक्ति को ऑनलाइन कार्य प्रगति की जानकारी भी मिलेगी। खास बात यह होगी कि तकनीक के अंतर्गत आप इंटरनेट पर खरीदी जाने वाली जमीन की सभी जानकारी हासिल कर सकेंगे।
यहां तक कि भूमि की पैमाइश आदि कराने के लिए किसी पटवारी आदि की भी जरूरत नहीं होगी। इंटरनेट पर ही जमीन की माप और उसकी हदबंदी की भी जानकारी मिल सकेगी। इससे जमीन संबंधी किसी प्रकार के विवाद की गुंजाइश नहीं होगी। प्रो. कमल जैन ने बताया कि सरकार के स्तर पर उनके प्रोजेक्ट को सराहना मिली है। सैद्धांतिक मंजूरी के बाद जल्द ही धरातल पर योजना को लाने के लिए सर्वे का काम शुरू किया जाएगा।
वेब जीआईएस बेस्ड तकनीक देगी हर पल की खबर
इस दिशा में अपनाई जा रही विभिन्न तकनीकियों में सबसे पहले डिजिटलाइज्ड की बात होती रही है, लेकिन प्रो. कमल जैन के अनुसार डिजिटलाइज्ड तकनीक का धरातल पर कोई फायदा नहीं होता, क्योंकि इसमें जमीनों की खरीद फरोख्त में हर दिन होने वाले परिवर्तन और जमीन की ऑनलाइन डिटेल हासिल नहीं की जा सकती।
इसके चलते जमीनों संबंधी धोखाधड़ी की आशंका बनी रहती है, लेकिन वेब जीआईएस बेस्ड तकनीक से प्रतिपल जानकारी अपडेट होगी। तकनीकी के तहत किसी इंटरनेट पर किसी भी जमीन के टुकड़े के चारों कोनों की जानकारी लोंगिट्यूड और लैटीट्यूड से मिलेगी। अभी तक जो काम मैनुअली होता था, वह अब वेब जीआईएस बेस्ड तकनीक से होगा। इससे जमीन फर्जीवाड़ा करने वाले लोगों पर लगाम लगेगी।