रुड़की। सिविल अस्पताल में आने वाले मरीजों की मुश्किलें कम नहीं हो रही है। सोमवार को अस्पताल में एआरवी इंजेक्शन (कुत्ते काटे का इंजेक्शन) खत्म हो गए। इससे मरीजों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। मरीजों को निराश होकर वापस लौटना पड़ा।
सिविल अस्पताल में प्रतिदिन औसतन 100 से अधिक मरीज कुत्ते काटे के आते हैं। सोमवार को भी प्रतिदिन की तरह से 100 से अधिक मरीज कुत्ते काटे के आए। चिकित्सकों ने इन लोगों को एआरवी इंजेक्शन लगवाने की सलाह दी। जब मरीज इंजेक्शन रूम में पहुंचे तो पता चला कि इंजेक्शन खत्म हो गए। मरीज सीएमएस के पास भी पहुंचे। उन्होंने बताया कि इंजेक्शन खत्म हो गए है।
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मेडिकल स्टोर पर 350 रुपये का इंजेक्शन
रुड़की। सिविल अस्पताल में एआरवी इंजेक्शन खत्म हो जाने की वजह से मरीजों को बाहर मेडिकल स्टोरों से यह इंजेक्शन खरीदना पड़ा। मरीजों ने बताया कि मेडिकल स्टोरों पर यह इंजेक्शन 350 रुपये का मिला।
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क्या कहते हैं मरीज
रैबीज इंजेक्शन लगवाने के लिए आई थी। लेकिन अस्पताल आने पर पता चला कि इंजेक्शन खत्म हो गए हैं। यह भी नहीं बता रहे हैं कि इंजेक्शन कब आएंगे।
मेनका, सोहलपुर गाड़ा
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कुत्ते ने काटा है। चिकित्सक ने इंजेक्शन लगवाने के लिए कहा है। लेकिन अस्पताल में इंजेक्शन नहीं मिल पाया है।
देवांशु, तेलीवाला रसूलपुर
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अस्पताल में कुत्ते काटे का इंजेक्शन नहीं है। यहां आकर पता चला कि इंजेक्शन नहीं है। अब उसे निराश होकर वापस जाना पड़ रहा है।
गुलाब सिंह, दाबकी कलां
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कुत्ते ने काटा है। इंजेक्शन लगवाने के लिए वह 40 किलोमीटर दूर से आया हूं। लेकिन यहां आकर पता चला कि इंजेक्शन खत्म हो गए हैं।
सुखविंदर कौर, ऐथल, लक्सर
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हर माह लगते हैं ढाई हजार इंजेक्शन
सिविल अस्पताल में हर माह करीब 800 से 900 लोग ऐसे आते हैं जिन्हें कुत्ते ने काटा होता है। एक मरीज को तीन निश्चित अंतराल में एआरवी इंजेक्शन लगते हैं। जिसके कारण एक माह में करीब ढाई हजार एआरवी इंजेक्शन की जरूरत सिविल अस्पताल को रहती है।
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कई दवाओं का कोटा हुआ खत्म
रुड़की। सिविल अस्पताल रुड़की में एआरवी इंजेक्शन के अलावा कई अन्य दवाएं भी खत्म हो चुकी हैं। बाहर मेडिकल स्टोर से मरीजों को दवाएं खरीदनी पड़ रही है। अस्पताल की डिस्पेंसरी में फिलहाल पेट दर्द की गोली, आंखों की ड्राप, खुजली का लोशन, सिटराजिन सिरप आदि दवाएं खत्म हो गई हैं।
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नई नीति लागू होने से हो रही परेशानी
दवा खरीद को लेकर जुलाई माह में नई नीति लागू की गई है। जिसमें दवाओं के लिए स्वीकृत बजट के 30 फीसदी रकम से अस्पताल स्थानीय स्तर पर दवाएं खरीद सकता है। जबकि 70 फीसदी बजट से निदेशालय से दवाएं आएंगी। अस्पताल अपने हिस्से के 30 फीसदी बजट से दवाएं खरीद चुका है। अब सभी दवाएं निदेशालय की ओर से दी जाएंगी। जबकि इससे पहले सिविल अस्पताल ही सभी दवाएं अपने स्तर से खरीदता था।
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एआरवी इंजेक्शन के लिए एक माह पूर्व अस्पताल की ओर से निदेशालय को डिमांड भेजी जा चुकी है। लेकिन अभी तक भी इंजेक्शन नहीं आ पाए हैं। इसके लिए लगातार लिखा जा रहा है।
- डा. रविंद्र थपलियाल, सीएमएस