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न नाले बने, न लगा कूड़ा प्लांट और न ही हुआ स्टेडियम का जीर्णोद्धार

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शहर में वर्षों से अटके काम को गति नहीं मिल पा रही है। कभी शासन स्तर पर मामला लटक जाता है तो कभी कोरोना के चलते काम की गति मंद पड़ रही है। इसके चलते निगम क्षेत्र में जलभराव समेत तमाम समस्याएं दूर नहीं हो पा रही हैं। हर साल शहर में बरसात के दिनों में लोगों को जलभराव का सामना करना पड़ा रहा है, लेकिन विभागीय कार्रवाई सिर्फ नालों की सफाई तक सीमित है।
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नगर निगम क्षेत्र के विस्तार के बाद वार्डों की संख्या 20 से बढ़कर 40 हो गई है, लेकिन इसके सापेक्ष कार्यों की रफ्तार तेज नहीं हो पाई है। नतीजतन, स्थिति यह है कि शहर में जो समस्याएं चार साल पहले थीं, वह जस की तस हैं। मसलन, थोड़ी सी ही बारिश में गलियां पानी से लबालब हो जाती हैं। इससे निजात के लिए बड़े नालों के निर्माण की दरकार है, लेकिन अभी तक यह काम शुरू नहीं हुआ है। हालांकि, नए नालों के निर्माण के लिए सर्वे का काम शुरू हो गया है। फिलहाल जलभराव को दूर करने के उपाय महज नाला सफाई तक सीमित हैं। वहीं, नगर निगम स्वच्छता के मामले में तीन बार प्रदेश में नंबर वन रह चुका है, बावजूद इसके अभी तक कूड़ा निस्तारण के इंतजाम नहीं हो सके हैं।
करीब छह वर्षों से शहर में कूड़े से बिजली बनाने वाले प्लांट को लगाने की कसरत चल रही है, लेकिन शासन स्तर से अभी तक टेंडर जारी नहीं हो सका है। ऐसे में शहर से निकलने वाले सैकड़ों मीट्रिक टन कूड़े को सालियर में डंप किया जा रहा है। कई वर्षों से यहां कूड़ा जमा होने से पहाड़ बन गए हैं। कूड़े के ढेर से खतरनाक बीमारियों के पनपने का खतरा बना हुआ है। वहीं, शहर में खिलाड़ियों के खेलने के लिए एकमात्र नेहरू स्टेडियम ही उपयुक्त जगह है, लेकिन यहां भी सिवाय मैदान के और कोई सुविधा नहीं है। चार साल पहले तत्कालीन सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत ने स्टेडियम के जीर्णोद्धार की घोषणा की थी, लेकिन अभी तक इस दिशा में भी कोई काम नहीं हो सका है। इसके चलते खिलाड़ियों में मायूसी है। इसके अलावा शहर में कई अन्य महत्वपूर्ण योजनाओं पर धीमी गति से काम चल रहा है। इसके चलते लोगों में निराशा का माहौल है।
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न जगह चिन्ह्ति न ही पार्किंग
बाजारों में पार्किंग के लिए स्थायी जगह चिह्नित नहीं है। सड़कों पर वाहन खड़े होने से जाम लगता है। सिविल लाइंस क्षेत्र में शाम चार बजे के बाद चौपहिया वाहनों के प्रवेश पर प्रतिबंध है, लेकिन अन्य बाजारों में चौपहिया वाहनों की आमद से जाम की स्थिति बनी रहती है। शहर में मुख्यमंत्री घोषणा के तहत मल्टी स्टोरी पार्किंग के निर्माण का काम भी शुरू नहीं हो पाया है।
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कोरोना के बावजूद पिछले करीब डेढ़ वर्षों में तेजी से निर्माण कार्य कराए जा रहे हैं। स्थिति में धीरे-धीरे सुधार हो रहा है। नाले के सर्वे का काम शुरू हो चुका है। जल्द डीपीआर तैयार होगी। कूड़ा निस्तारण प्लांट के लिए भी शासन स्तर पर कवायद चल रही है। जल्द ही टेंडर जारी होंगे। बहुत जल्द सभी रुके काम पूरे कराए जाएंगे।
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-गौरव गोयल, मेयर, रुड़की
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