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म्यूजिकल नाइट ने बांधा समां, झूमे लोग

Sun, 24 Apr 2016 11:51 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला रुड़की
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अमर उजाला - फोटो : अमर उजाला
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रुड़की। अमर उजाला शॉपिंग फेस्टिवल के आखिरी दिन म्यूजिकल नाइट ने ऐसा समां बांधा कि लोग झूमने को मजबूर हो गए। कलाकारों ने सूफी, रोमांटिक, देशभक्ति, भक्ति और गजल आदि सुनाकर सभी दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।
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अमर उजाला शॉपिंग फेस्टिवल में म्यूजिकल नाइट का शुभारंभ पिरान कलियर विधायक मोहम्मद फुरकान एवं पूर्व राज्यमंत्री एवं कांग्रेस प्रदेश उपाध्यक्ष मनोहर लाल शर्मा ने संयुक्त रूप से किया। इस अवसर पर पूर्व राज्यमंत्री मनोहर लाल शर्मा ने अमर उजाला की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे आयोजनों से मनोरंजन तो होता ही है साथ ही स्थानीय कलाकारों को एक मंच भी मिलता है। इससे मनोबल बढ़ता है और आगे बढ़ने की प्रेरणा भी मिलती है।

रिदमिक डिलाइट एंड रॉयल ऑरकेस्ट्रा ग्रुप हरिद्वार ने कार्यक्रम शुरू किया। कलाकार रविंद्र कुमार विश्वकर्मा ने ...जाने जहां ढूंढता फिर रहा..., मैं एक चोर तू मेरी रानी, कह दूं तुम्हें या चुप रहूं, अर्चना ने खामोशियां गुनगुनाने लगी, जाने कैसे कब कहां...। मेहुल ने ओ अरे पिया रे..., तेरी दिवानी..., सुरभि ने संवार लू... एवं बात यह कभी न भूलना..., आशीष ने इक प्यार का नगमा है...। स्वाति ने तिनका-तिनका जरां जरां... और अमर उजाला के मेहताब आलम ने संदेशे आते हैं हमें तड़पाते हैं..., दरदे दिल दरदे जिगर..., मैं जट यमला पगला दिवाना..., अपनी तो ऐसे जैसे... और हमको हमीं से चुरा लो... आदि गीत सुनाकर सबको झूमने पर मजबूर किया। प्राकृतिक मसाले की ओर से कलाकारों को सम्मानित किया गया।
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आखिरी दिन रिकार्ड तोड़ भीड़
रुड़की। अमर उजाला शॉपिंग फेस्टिवल के आखिरी दिन रविवार को मेले में भारी भीड़ उमड़ी। परिवार सहित मेले में पहुंचे लोगों ने जमकर खरीदारी कर स्वादिष्ट व्यंजन का लुत्फ उठाया। बच्चों ने झूले और ऊंट की सवारी का आनंद भी लिया। 15 अप्रैल से शुरू हुआ मेले रविवार को संपन्न हुआ। दस दिन तक चले इस मेले में प्रतिदिन लोगों की भारी भीड़ रही। लोगों ने मेले के दौरान आयोजित हुए विभिन्न कार्यक्रमों का जमकर आनंद उठाया।

इनका सहयोग सराहनीय
मेले के आयोजन में आरोग्यम अपार्टमेंट्स, मदरहुड विवि, इवेंट पैराडाइज, जीटीएम फूड्स एंड एंटरटेनमेंट सिटी, विंडलास रिवर वैली, पैनाष रिवर वैली, टोयोटा, सहजभोग आटा, हुंड्ई, डिवाइन होंडा, रिनॉल्ट कार, टाटा मोटर्स, महेंद्रा टू व्हीलर, जी माउंट लिटरा स्कूल, आईएफडी माइक्रो ओवन, प्रकाश स्वीट्स एवं होटल, बेस्ट इंडिया बॉडी केयर, लेमनिश एलईडी, मॉरिस इनोवेशन फैशन एकेडमी हरिद्वार आदि का सहयोग रहा। आरोग्यम अपार्टमेंट्स के वीपी राजेश मेहता और कंचन जैन ने मेले में मौजूद लोगों को लक्की ड्रा के जरिये अपने यहां तीन कपल को पूल साइड डीनर का ऑफर दिया। इसके लिए लोगों को कपल लिखकर 9654232351 पर एसएमएस करना होगा।

हम दोस्ती में सर देते हैं, दुश्मनी में उतार देते हैं
रुड़की। अमर उजाला शॉपिंग फेस्टिवल के अंतर्गत शनिवार को आयोजित कवि सम्मेलन में जहां कवियों ने देशभक्ति का जज्बा पैदा किया वहीं हास्य व्यंग्य के जरिए हंसी ठहाके भी लगे। इस दौरान बड़ी संख्या में उपस्थित हुए श्रोताओं ने सम्मेलन का लुत्फ उठाया।
सम्मेलन का उद्घाटन मुख्य अतिथि एवं पूर्व विधायक सुरेश चंद जैन एवं भाजपा प्रदेश उपाध्यक्ष मयंक गुप्ता सहित सम्मानित कवियों ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया।

पूर्व विधायक जैन ने कहा कि कविताओं के माध्यम से मनुष्य भावों की गहराई में उतर जाता है। जो समाज को बदलने का भी सशक्त माध्यम है। खंड शिक्षा अधिकारी ब्रह्मपाल सिंह सैनी की अध्यक्षता एवं डा. सौरभ गुप्ता के संचालन में आयोजित कवि सम्मेलन में श्रोताओं को संबोधित करते हुए कवि महावीर सिंह वीर ने कहा कि विनय सुनता नहीं कोई, दबावों का जमाना है। नहीं दुनिया शरीफों की, खराबों का जमाना है। तुम्हारी बात सच्ची है मगर कैसे सुने कोई, शहद लेकर भटकते हो, शराबों का जमाना है। कवि पंकज गर्ग ने कहा कि ये मेरा जिस्म मेरे देश की अमानत है, हिंद सांसों में बसा है मेरी मुहब्बत है। मै भगत सिंह नहीं हूं मगर सोच वही, शहीद होने से बेहतर भी क्या इबादत है।

कवि नरेश राजवंशी ने कहा कि दुश्मन को भी जी जां से प्यार देते हैं, गर्दिशे वक्त की जुल्फे संवार देते हैं। हमारी शराफत को कमजोरी समझने वालों, हम दोस्ती में सर देते हैं, दुश्मनी में उतार देते हैं। कवि अजय कुमार त्यागी ने कहा कि आंख में गिरे धूल तो किरकिरी हो जाती है, बात अगर सच्ची हो तो सिरफिरी हो जाती है। कवि आदित्यवीर ने कहा कि बस यूं ही लिखता हूं, वजह क्या होगी। राहत जरा सी, आदत जरा सी। सम्मेलन की अध्यक्षता कर रहे बीईओ एवं कवि ब्रह्मपाल सिंह सैनी ने सुनहरा में आजादी का प्रतीक बरगद के पेड़ को केंद्रित करते हुए कुछ यूं कहा कि बूढ़ा है पर अड़े खड़ा है, बरगद मेरे गांव में, लगती थी चौपाल क्रांति की, बैठकें जिसकी छांव में। वहीं संचालन कर रहे कवि डा. सौरभ गुप्ता ने कहा कि जुगनुओं टिमटिमाने से कुछ नहीं होगा, नये आफताब उगाने होंगे। अंधेरे आमादा है हुकूमत के लिए, हमको मिलकर नये चिराग जलाने हैं।

इस दौरान उपस्थित श्रोताओं ने तालियों की गडग़ड़ाहट से कवियों का साथ दिया। इस दौरान पार्षद प्रदूम्र सिंह, ब्रिजेश त्यागी, शोभाराम प्रजापति, कुंवर नागेश्वर, गजेंद्र सिंह, प्रमोद चौधरी, दिनेश धीमान, वरुण त्यागी, अमन गोयल, अमित प्रजापति, संजय कश्यप, घनश्याम बादल एवं दीपक आदि मौजूद रहे।
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