क्षेत्र में बंदरों के बढ़ते आतंक से आमजन, स्कूली बच्चे और महिलाएं खासे परेशान हैं। फलों का मौसम समाप्त होते ही बंदरों के झुंड गांवों की ओर रुख कर लेते हैं। इससे फसलों के साथ-साथ घरों को भी नुकसान हो रहा है।
ग्रामीणों के अनुसार बंदर घरों में घुसकर घरेलू सामान उठा ले जाते हैं और धूप में सुखाए गए कपड़ों को भी नुकसान पहुंचा रहे हैं। ग्रामीण मार्गों पर झुंड बनाकर बैठे बंदर स्कूल और ट्यूशन जाने वाले बच्चों के लिए खतरा बने हुए हैं। कई बार रास्ता रोकने पर बच्चों को घंटों इंतजार करना पड़ता है।
बनवाला गांव के अरविंद सैनी, मखमली देवी, कर्म सिंह, महेंद्र सिंह, पुष्पेंद्र कुमार, तेलपरा गांव के मेघपाल सैनी, कुशल पाल चौहान, ओमकार चौहान, पंकज सैनी, योगेश सैनी, प्रभात सैनी और बुग्गावाला के अमरदीप सिंह, संदीप सैनी, प्रमोद सैनी, सोनू कुमार, प्रवीण कुमार सहित अन्य ग्रामीणों ने प्रशासन से बंदरों के आतंक से निजात दिलाने की मांग की है।
हरिद्वार के प्रभागीय वनाधिकारी (डीएफओ) स्वप्निल अनिरुद्ध ने बताया कि बंदरों के बढ़ते आतंक को रोकने के लिए सरकार की ओर से एक योजना लागू की गई है। बंदरों की बढ़ती आबादी को नियंत्रित करने के उद्देश्य से बंध्याकरण का कार्य किया जा रहा है। हरिद्वार जिले में कुल 2000 बंदरों के बंध्याकरण का लक्ष्य निर्धारित किया गया है जिनमें से अब तक 1500 बंदरों का बंध्याकरण किया जा चुका है। शेष 500 बंदरों का बंध्याकरण कार्य प्रगति पर है। उन्होंने बताया कि जल्द ही क्षेत्र में बंदरों की समस्या से राहत मिलने की उम्मीद है।