उत्तराखंड अल्पसंख्यक कल्याण विभाग की ओर से मदरसों और महाविद्यालयों में अनुदान राशि से खरीदे गए फर्नीचर और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों में गोलमाल का मामला सामने आया है। इसका पता उस समय चला जब विभाग की ओर से मदरसों और महाविद्यालयों में भेजे गए कंप्यूटर, आरओ/वाटर कूलर और कुर्सियों की क्वालिटी घटिया पाई गई। कई मदरसों में तो कंप्यूटर को चलाया तक नहीं गया है। अब संचालकों ने उच्च गुणवत्ता का सामान उपलब्ध कराने की मांग की है।
उत्तराखंड शासन की ओर से वर्ष 2019 और 2020 में अनुदान स्वीकृत किया गया था। इसके तहत प्रदेश के 13 मदरसों और महाविद्यालयों को करीब डेढ़ करोड़ की लागत के कंप्यूटर, फर्नीचर और आरओ/वाटर कूलर उपलब्ध कराए जाने थे। इनमें से 12 मदरसे अकेले हरिद्वार के शामिल हैं। इसके लिए शासन ने उत्तराखंड अल्पसंख्यक कल्याण निदेशालय के निदेशक की अध्यक्षता में क्रय समिति का गठन किया था। अब हरिद्वार मदरसा व महाविद्यालय संचालकों ने क्रय प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं। बताया है कि विगत 13 मार्च को कुछ मदरसों में सामान भेजा गया है। इसके बाद संचालकों ने 21 मार्च और फिर 20 अप्रैल को भी निदेशालय को शिकायत भेजी लेकिन इस पर कोई कार्रवाई नहीं हुई।
संचालकों का कहना है कि जो आरओ/वाटर कूलर भेजे गए हैं, वह बाजार में स्थापित किसी कंपनी द्वारा नहीं बनाए गए हैं। इनकी बॉडी अत्यंत कमजोर है और फिनीशिंग भी नहीं है। बाजार में प्रसिद्ध कंपनियों के वाटर कूलर इससे कम कीमत के हैं। रुड़की महाविद्यालय लाठरदेवा शेख के प्राचार्य दीपक श्रीवास्तव ने बताया कि उनके यहां भेजी गई 49 कुर्सियों का मूल्य 3800 रुपये दर्शाया गया है। इसपर किसी निर्माता कंपनी का नाम नहीं है। इन कुर्सियों में लगाए गए पार्ट्स निम्नतम गुणवत्ता के हैं। इस तरह की कुर्सी की बाजार में कीमत 1300 से 1500 रुपये तक है। यही हालत अन्य सामान की भी है।
मुख्यमंत्री और विभागीय मंत्री को भेजा पत्र
रुड़की डिग्री कॉलेज, लाठरदेवा शेख, मदरसा जामिया रहीम बख्श एकेडमी, मदरसा आईशा सिद्दीकी लंढौरा, मदरसा नूरे हिदायत एकेडमी जौरासी व मदरसा फलाहे दारैन भारापुर के संचालकों की ओर से मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और कैबिनेट मंत्री चंदन रामदास को शिकायती पत्र भेजा गया है। पत्र में खरीदे गए सामान में बड़ा भ्रष्टाचार किए जाने का आरोप लगाया गया है। साथ ही यह सामान दोबारा से नया भिजवाने और खराब सामान खरीदने की एसआईटी जांच कराकर कार्रवाई की मांग की गई है।
शिकायत मिलने पर कॉलेज संचालकों की बैठक बुलाई गई थी ताकि उनकी शिकायत सुनी जा सके। बैठक में कॉलेज संचालक नहीं पहुंचे। संचालकों ने बैठक की आगामी तिथि तय करने की मांग की है। जल्द ही बैठक में शिकायतों का संज्ञान लिया जाएगा। इसके बाद नियम संगत कार्रवाई की जाएगी। - हीरा बसेड़ा, उप निदेशक, उत्तराखंड अल्पसंख्यक कल्याण निदेशालय