सर्दी के मौसम में पशु पालकों की थोड़ी सी लापरवाही भी दुधारू पशुओं को ठंडेला रोग की चपेट में ला सकती है। पशु स्वांस संबंधित रोग की चपेट में भी आ सकते हैं। थोड़ी सी सतर्कता उन्हें ठंड के रोगों से बचा सकती है।
इंसानों के साथ पशुओं के लिए भी ये मौसम खतरनाक है। इस समय दुधारू पशुओं के रहन-सहन और आहार का ठीक प्रकार से प्रबंध नहीं किया जाए तो उनकी सेहत खराब हो सकती है। इसका सीधा असर दुग्ध उत्पादन पर पड़ेगा। हालांकि, थोड़ी देखभाल और प्रबंधन कर पशुओं को ठंड से बचाया जा सकता है। मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. योगेेश भारद्वाज ने बताया कि इस समय तो पशुओं को सर्दी से बचाना बेहद जरूरी है। ठंड के चलते दुधारू पशु इस समय ठंडेला (मेस्टाइटिस) रोग की चपेट में आ जाते हैं। इसके अलावा पशुओं में ठंड के चलते स्वांस रोग होने की भी आशंका बढ़ जाती है। इस रोग में अक्सर छोटे पशुओं की मौत भी हो जाती है।
उन्होंने बताया कि थोड़े से मैनेजमेंट से पशुपालक अपने पशुओं को ठंड और इन रोगों से बचा सकते हैं। इसके लिए पशुशाला ऐसी होनी चाहिए, जहां पानी न ठहरता हो। फर्श या जमीन पर भूसा या पुआल पड़ी होनी चाहिए। पशुओं को ज्यादा देर तक बाहर न रखें। पशुओं पर गर्म कपड़े डालकर रखने चाहिए। पशुओं को किसी भी स्थिति में रात का रखा हुआ पानी न पिलाएं। नल से निकला हुआ ताजा पानी ही पिलाना चाहिए। वहीं, कई दिन धूप नहीं निकलने पर जहां तक संभव हो सके पशुओं को गुनगुना पानी पिलाएं।
पशुओं के आहार में शामिल करें गुड़ और सेंधा नमक
ठंड के मौसम में पशुओं के आहार में सेंधा नमक शामिल करें। केवल हरा चारा खिलाने से अफारा और अपचन भी हो सकता है। ऐसे में पशुओं की खोर (चारा डालने का स्थान) में सेंधा नमक का पत्थर डालकर रखे। इसके अलावा पशुओं को चारे के साथ गुड़ भी खिलाएं। गुड़ शक्तिवर्धक होता है और इसकी तासीर गर्म होती है।