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मशीनें भी, डॉक्टर भी, फिर भी परेशानी

Fri, 05 Feb 2016 11:44 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, रुड़की
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रुड़की। राजकीय सिविल अस्पताल रुड़की में जब रेडियोलॉजिस्ट था तो सीटी स्कैन, अल्ट्रासाउंड और डिजिटल एक्स-रे मशीन नहीं थी। अब मशीनें भी हैं, रेडियोलॉजिस्ट भी। लेकिन तकनीकी जानकारी नहीं होने से रेडियोलॉजिस्ट ने तीनों मशीनों को चलाने से इनकार करते हुए हाथ खड़े कर दिए हैं। परेशान मरीज निजी अस्पतालों का सहारा लेने को मजबूर हैं।
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करीब तीन वर्ष पहले रुड़की सिविल अस्पताल में रेडियोलॉजिस्ट डा. रुचि गुप्ता की तैनाती की गई थी। लेकिन उस समय अस्पताल में न सीटी स्कैन मशीन थी और न डिजिटल एक्स-रे। लेकिन मरीजों को अल्ट्रासाउंड का लाभ मिल रहा था। कुछ समय बाद डा. रुचि गुप्ता ने त्यागपत्र देकर कर अपनी निजी प्रैक्टिस शुरू कर दी। उसके बाद से अस्पताल में अल्ट्रासाउंड का काम भी बंद हो गया। करीब ढाई साल पहले तीन करोड़ की लागत से रुड़की सिविल अस्पताल में सीटी स्कैन मशीन लगाई गई। इसके बाद डिजिटल एक्स-रे मशीन स्थापित की गई, लेकिन किसी मरीज को इसका लाभ नहीं मिला। कारण कि अस्पताल में कोई रेडियोलॉजिस्ट नहीं था।
करीब तीन माह पहले सिविल अस्पताल में संविदा पर एक रेडियोलॉजिस्ट की तैनाती की गई। अस्पताल प्रबंधन और मरीजों में उम्मीद जगी कि अब लोगों को सीटी स्कैन और डिजिटल एक्स-रे का लाभ मिलने लग जाएगा। लेकिन एक बार फिर सभी की उम्मीदों पर पानी फिर गया। नए रेडियोलॉजिस्ट ने सीटी स्कैन और डिजिटल एक्स-रे तो दूर अल्ट्रासाउंड करने से भी हाथ खड़े कर दिए। इस संबंध में सिविल अस्पताल के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डा. रविंद्र थपलियाल का कहना है तैनात रेडियोलॉजिस्ट को आधुनिक मशीनों की जानकारी नहीं है। इसलिए मशीनों को शुरू नहीं किया जा सका है। इस संबंध में उच्च अधिकारियों को अवगत करा दिया गया है।
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सरकारी अल्ट्रासाउंड भी हो रहे बाहर
सिविल अस्पताल रुड़की में अल्ट्रासाउंड मशीन और रेडियोलॉजिस्ट के होते हुए भी सरकारी जांच निजी सेंटर से कराई जा रही है। यह सुविधा भी केवल गर्भवती महिलाओं के लिए ही है। अन्य मरीजों को निजी केंद्रों पर अपने खर्च पर अल्ट्रासाउंड कराने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है।

इनका कहना है
हाल में ही मैंने चार्ज ग्रहण किया है। इसलिए मुझे रुड़की सिविल अस्पताल की समस्याओं के संबंध में जानकारी नहीं है। अब प्राथमिकता से इस अस्पताल की समस्याओं का समाधान कराया जाएगा।
..कुसुम नारियाल, डीजी हेल्थ

डाक्टरों के कार्यबहिष्कार से मरीज परेशान
रुड़की। डीएसीपी (डायनेमिक एश्योर्ड कॅरियर प्रोग्रेशन) की मांग को लेकर सरकारी चिकित्सकों का दो घंटे का कार्यबहिष्कार मरीजों की तकलीफ बढ़ा रहा है। अस्पताल में उपचार को आ रहे मरीजों को लंबे इंतजार के बाद उपचार मिल रहा है।
प्रांतीय चिकित्सा सेवा संघ के आह्वान पर सिविल अस्पताल रुड़की के चिकित्सक डीएसीपी की मांग को लेकर प्रतिदिन सुबह नौ बजे से 11 बजे तक का कार्यबहिष्कार कर रहे हैं। जबकि परेशान मरीज उपचार की आस में सुबह अस्पताल पहुंच जाते हैं। लेकिन चिकित्सक 11 बजे के बाद ही ओपीडी में पहुंच रहे हैं। तब तक मरीज ओपीडी के बाहर बैठे रहते हैं। शुक्रवार को भी चिकित्सकों के दो घंटे के कार्यबहिष्कार के चलते मरीज परेशान रहे। मरीजों का कहना है वह सुबह उपचार के लिए पहुंच गए थे। लेकिन डाक्टरों के 11 बजे ओपीडी में बैठने के बाद इलाज मिल पाता है। उससे पहले घंटों लंबी लाइनों में लगना पड़ता है। चिकित्सकों का कहना है कि जब तक उनकी मांगों को नहीं मान लिया जाता उनका आंदोलन जारी रहेगा। सात फरवरी के बाद आंदोलन तेज किया जाएगा।
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