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Roorkee News: प्रोत्साहन राशि खाते में भेजने के फैसले पर भड़के पशुपालक, दूध की आपूर्ति रोकी

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हरिद्वार दुग्ध उत्पादक सहकारी संघ शिकारपुर से जुड़े पशुपालकों ने प्रोत्साहन राशि के भुगतान की व्यवस्था में बदलाव के विरोध में शनिवार को एक दिवसीय हड़ताल की। नाराज करीब 40 पशुपालकों ने संस्थान को दूध नहीं दिया। यह हड़ताल जारी रही तो सप्लाई चेन प्रभावित हो सकती है। पशुपालकों ने दूध का क्रय मूल्य निजी कंपनियों के बराबर करने और चार रुपये प्रति लीटर प्रोत्साहन राशि को दूध के भुगतान के साथ ही नकद देने की मांग की।
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शिकारपुर स्थित हरिद्वार दुग्ध उत्पादक सहकारी संघ में जिले भर की रजिस्टर्ड करीब 265 समितियां हैं जिनसे करीब 2300 पशुपालक जुड़े हैं। इन समितियों के जरिये जिले के 11 रूट पर दूध की सप्लाई होती है। हरिद्वार दुग्ध संघ की ओर से पहले पशुपालकों को 52 रुपये प्रति लीटर दूध के क्रय मूल्य के साथ चार रुपये प्रति लीटर प्रोत्साहन राशि भी एकमुश्त दी जा रही थी।
अब प्रोत्साहन राशि अलग से खातों में भेजने का निर्णय लिया गया है। इससे पशुपालकों में नाराजगी है। उनका कहना है कि सहकारी संघ से पहले ही भुगतान मिलने में देरी होती है। ऐसे में प्रोत्साहन राशि अलग से मिलने पर आर्थिक परेशानी बढ़ेगी। पशुपालकों के अनुसार, शुक्रवार को भगवानपुर, खानपुर, नारसन, लक्सर और इकबालपुर रूट की कुछ समितियों ने दूध नहीं देने का निर्णय लिया था।
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इसके बाद शनिवार को हड़ताल की गई। पशुपालकों ने डीबीटी के माध्यम से प्रोत्साहन राशि लेने से इन्कार करते हुए पूरा भुगतान एक साथ करने की मांग उठाई। हरिद्वार दुग्ध संघ के प्रबंधक अजय क्वीरा ने बताया कि पहले 52 रुपये प्रति लीटर क्रय मूल्य के साथ चार रुपये प्रोत्साहन राशि एकमुश्त दी जाती थी। अब शासन के निर्णय के अनुसार प्रोत्साहन राशि अलग से पशुपालकों के खातों में भेजी जाएगी। उन्होंने बताया कि पशुपालकों की मांगों को लेकर उच्च अधिकारियों से वार्ता की जा रही है।
पशुपालकों का कहना है कि दूध की कीमत समय पर नहीं मिलती है। ऐसे में प्रोत्साहन राशि अलग से देने के फैसले से घर का खर्च चलाना मुश्किल होगा। -प्रशांत कुमार, झबीरन
पशुपालकों ने कहा कि दूध का क्रय मूल्य और चार रुपये प्रति लीटर प्रोत्साहन राशि एक साथ दी जानी चाहिए। अलग-अलग भुगतान से उन्हें आर्थिक दिक्कतों का सामना करना पड़ेगा। -हरपाल सिंह, मानकपुर

पशुपालकों की मांग है कि सहकारी संघ दूध का क्रय मूल्य निजी कंपनियों के बराबर करे। इससे पशुपालन में बढ़ते खर्च के बीच उन्हें उचित दाम मिल सकेंगे। - विनय पंवार सकौती
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