मौसमी फसलें साग-सब्जी जैसे-जैसे खत्म होती जा रही हैं। वैसे-वैसे सब्जियों के दामों में बढ़ोतरी हो रही है। हरी मिर्च, शिमला मिर्च, बैंगन आदि साग-सब्जियां पहले से दोगुने दामों में थोक में बिक रही हैं। ऐसे में सब्जी मंडी से खरीदकर बेचने वाले दुकानदारों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
मौसमी सब्जी में आने वाली फसलें आलू, गोभी, मटर, मूली, गाजर, पालक, मेथी, हरी मिर्च, शिमला मिर्च जैसी फसलें समय के अनुसार धीरे-धीरे खत्म हो रही हैं। इसके चलते मंडी और बाजारों में साग-सब्जियों के दाम दोगुने हो गए हैं। सब्जी विक्रेता राजेंद्र सैनी, ब्रह्मपाल सैनी, रमेश, सतपाल सिंह, मोतीराम, पवन कुमार, मेहरबान, इस्लाम का कहना है कि सब्जी मंडियों में सब्जियां पहले से कम मात्रा में आ रही हैं। सब्जियों के दाम थोक में मंडी में पहले से दोगुना हो चुके हैं। वहीं, उद्यान निरीक्षक कोमल कुमार का कहना है कि रबी की फसलें समय के अनुरूप धीरे-धीरे खत्म होती जा रही हैं। जनवरी में बरसात अधिक होने के चलते भी खेतों में सब्जियों पर काफी असर हुआ है।
एक माह में बढ़े सब्जी के दाम-
हरी मिर्च- 40 - 100 रुपये किलो
शिमला मिर्च- 50- 80 रुपये किलो
बैंगन-20- 40 रुपये किलो
गोभी- 20- 30 रुपये किलो
मटर- 20- 40 रुपये किलो
आलू- 10- 20 रुपये किलो
गाजर- 10- 20 रुपये
एक माह देर से होगी बुआई
इस बार जनवरी में बरसात के चलते करेला, लौकी, तोरी, भिंडी आदि की अगेती फसल की बुआई करीब एक महीना देरी से की जाएगी। किसान श्याम सिंह, दिनेश कुमार, पंकज कुमार, लक्ष्मीचंद, सुधीर कुमार, मेहरबान, इस्लाम अली का कहना है कि अधिक बारिश के कारण खेतों में पानी भरा हुआ है। खेत गीले होने के चलते अगेती साग-सब्जी की फसलों की बुआई नहीं हो पा रही है। जनवरी में बोई जाने वाली सब्जियों की अगेती फसल एक महीना पछेती हो गई है।