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कच्चे माल में तेजी से 40 प्रतिशत दवाओं के दाम में होगा इजाफा

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दवाओं के कच्चे माल में आई तेजी और भाड़े में बढ़ोतरी से क्षेत्र की करीब 90 दवा कंपनियां प्रभावित हुई हैं। माना जा रहा है कि आने वाले समय में इस तेजी से दवाओं के दाम में 40 फीसदी तक इजाफा हो सकता है। फिलहाल दाम नियंत्रित है, लेकिन दवाओं की जो खेप तैयार की जा रही है, उसके बाजार में पहुंचने पर मरीजों को जेब ढीली करनी पड़ेगी।
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रुड़की के पास भगवानपुर स्थित औद्योगिक क्षेत्र में करीब 500 फैक्टरियां हैं। इनमें 90 से 95 फैक्टरियां दवा बनाती हैं। फैक्टरी मालिकों के अनुसार, करीब एक महीने से दवाओं के लिए काम आने वाले साल्ट के दामों में 20 से 25 फीसदी तक की बढ़ोतरी हो चुकी है। भगवानपुर इंडस्ट्रियल एसोसिएशन के महासचिव गौतम कपूर ने बताया कि चीन से आने वाले माल के भाड़े में अचानक चार गुना तक वृद्धि हो चुकी है। इसके अलावा शिप के जरिये आ रहे माल की डिलीवरी के लिए महीनों की वेटिंग चल रही है। स्थानीय फैक्टरियों में साल्ट से संबंधित कच्चा माल ज्यादातर चीन से ही आता है। इसके चलते दवा कंपनियों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने बताया कि आने वाले समय में कच्चे माल और भाड़े में हुई बढ़ोतरी के चलते दवा के दामों में 40 फीसदी तक की वृद्धि हो सकती है।
बाजार में प्रतिस्पर्द्धा पर निर्भर करेंगे दवाओं के दाम
गौतम कपूर ने बताया कि दवाओं के दाम पर सरकार का कोई नियंत्रण नहीं होता है। विभिन्न कंपनियों की दवाएं जब बाजार में पहुंचती है तो प्रतिस्पर्द्धा के तहत दवाओं के दाम निर्धारित होते हैं। ऐसे में फिलहाल जिन दवाओं का निर्माण हो रहा है, ये जब बाजार में पहुंचेंगी तब इनका दाम निर्धारित होगा, लेकिन जिस तरह से कच्चे माल और भाड़े में तेजी आई है, उससे सभी कंपनियों की दवाओं के दाम 30 से 40 फीसदी बढ़ने तय हैं।
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प्लास्टिक के उत्पादों में भी आएगी तेजी
भगवानपुर इंडस्ट्रियल एसोसिएशन के महासचिव ने बताया कि प्लास्टिक के दामों में भी वृद्धि हो सकती है। क्योंकि, प्लास्टिक का कच्चा माल भी महंगी दरों पर पहुंच रहा है। भगवानपुर औद्योगिक क्षेत्र में करीब 80 फैक्टरियां प्लास्टिक का उत्पादन करती हैं।
बिजली कट से उठाना पड़ रहा नुकसान
देशभर में पैदा हुए बिजली संकट का असर फैक्टरियों पर भी पड़ रहा है। हालांकि, राज्य में इसका असर कम है। जानकारी के मुताबिक, चार-पांच दिन पहले औद्योगिक क्षेत्र में तीन से चार घंटे की कटौती हुई थी, लेकिन पिछले एक-दो दिन से आधे से एक घंटे की कटौती हो रही है। गौतम कपूर ने बताया कि औद्योगिक क्षेत्र में कई ऐसी फैक्टरियां है, जिनमें अल्प समय के लिए कटौती होने से प्रिंटर और फिटर जैसे उपकरण ठप हो जाते हैं। इसके चलते कंपनियों को भारी नुकसान उठाना पड़ता है। उन्होंने बताया कि लाइनों में फाल्ट के चलते भी बिजली कट हो जाती है। ऊर्जा निगम को व्यवस्थाओं में सुधार करना चाहिए।
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