नगर निगम की ओर से ठेका जारी होने की बात कहकर कुछ लोग दशहरा मेला में आने वाले लोगों से अवैध रूप से 50 और 100 रुपये पार्किंग शुल्क वसूलने लगे। जागरूक लोगों ने इसकी शिकायत की तो पूरा राज खुल गया। अवैध पार्किंग शुल्क की शिकायत का नगर निगम के अधिकारियों ने तत्काल संज्ञान लिया। टीम मौके पर पहुंची तो पार्किंग शुल्क वसूलने वाले भाग खड़े हुए। निगम प्रशासन ने पार्किंग वसूली बंद कराने के साथ ही संबंधित लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने की तैयारी शुरू कर दी है।
शहर में जगह-जगह सार्वजनिक स्थानों पर पार्किंग की कोई सुविधा नहीं है, लेकिन समय-समय पर फर्जी तरीके से गिरोहबंद लोगों की ओर से रसीद काटकर पार्किंग शुल्क की वसूली की शिकायतें मिलती रहती हैं। फर्जी रसीद काटने वाले ये लोग कभी तहसील प्रशासन से अनुमति का हवाला देते हैं तो कभी नगर निगम से ठेका जारी होने का रौब गालिब करते हैं। शुक्रवार को तो कुछ लोग दशहरे के मेले का फायदा उठाकर अलीश पार्किंग स्टैंड के नाम पर छपवाई गई रसीदों के आधार पर लोगों से 50 से 100 रुपये की पार्किंग शुल्क वसूलने लगे। पार्किंग की वसूली मेन सड़क पर खड़े वाहनों से तो की ही जा रही थी, साथ ही गलियों में बाइकें खड़ी कर मेला देखने जा रहे लोगों से भी वसूली शुरू कर दी गई।
इसी दौरान शहर निवासी नितीश कंसल ने वसूली कर रहे लोगों से पूछा तो उन्होंने बताया कि पार्किंग का ठेका निगम ने जारी किया है और वे नगर निगम के किसी त्यागी नाम के व्यक्ति के आदेश पर रसीद काट रहे हैं। इस संबंध में नगर निगम के अधिकारियों से जानकारी ली गई तो पता चला कि पार्किंग का कोई ठेका जारी नहीं किया गया है। नगर आयुक्त नूपुर वर्मा ने अधिकारियों को तत्काल जांच कराकर कार्रवाई के आदेश दिए। सहायक नगर आयुक्त एसपी गुप्ता ने बताया कि सूचना मिलते ही टीम भेजकर अवैध वसूली बंद करा दी गई थी। मामले में एफआईआर दर्ज कराया जाएगा।
राज खुलते ही भाग खड़े हुए
जैसे ही नगर निगम के अधिकारी और कर्मचारी मौके पर जांच करने पहुंचे तो अवैध वसूली कर रहे लोग भाग खड़े हुए। निगम प्रशासन की ओर से जानकारी ली गई तो पता चला कि रामनगर क्षेत्र के रहने वाला व्यक्ति अवैध वसूली कर रहा था। निगम प्रशासन मामले की जांच में जुटा है।
चंद घंटों में ही वसूल लिए हजारों
अवैध रूप से पार्किंग वसूलने वालों ने लोगों पर रौब गालिब करते हुए एक घंटे में ही हजारों रुपये वसूल लिए। जागरूक लोगों की शिकायत के चलते यह वसूली दो से तीन घंटे ही हो पाई। राज नहीं खुलता तो शाम तक जुटने वाली भीड़ से लाखों की अवैध वसूली की जाती।