रुड़की। मशक्कत के बाद अब अर्थक्वेक डिपार्टमेंट की ओर से आईआईटी परिसर में अर्ली वार्निंग सिस्टम लगाने की तैयारी पूरी कर ली गई है। इस संबंध में दो दिसंबर को बैठक बुलाई गई है, जिसमें हॉस्टलों के वार्डन, डीन सहित प्रशासन को भी शामिल करने की तैयारी है। आईआईटी प्रबंधन के अनुसार अर्ली वार्निंग सिस्टम से परिसर में भूकंप की जानकारी पहले ही मिल सकेगी।
आईआईटी रुड़की देश का पहला संस्थान होगा, जहां भूकंप से 30 सेकंड पहले ही लोगों को चेतावनी जारी हो सकेगी। प्रोजेक्ट हेड और आईआईटी के वरिष्ठ वैज्ञानिक प्रो. अशोक कुमार की मानें तो भूकंप अलर्ट के लिए परिसर में पूरी व्यवस्था सुनिश्चित कर ली गई है। तकनीकी तौर पर इसे पूरी तरह से फिट पाया गया है। ऐसे में अब इसे परिसर में उतारने की तैयारी चल रही है। इसके तहत अब दो दिसंबर को बैठक की जानी है, जिसमें सभी हॉस्टलों के वार्डन, डीन और प्रशासन को भी शामिल किया जाएगा। उन्होंने कहा कि पहले इसे आईआईटी परिसर में शुरू किया जा रहा है।
इसके तहत हॉस्टलों और परिसर मे फिलहाल 12 सायरन लगाने की योजना है। इसके बाद इसे देशभर में लागू करने के लिए केंद्र की नेशनल डिजास्टर मैनेजमेंट एजेंसी को भी पत्र लिखा जाएगा, ताकि आमजन को भी इसका लाभ मिल सके। मालूम हो कि मिनिस्ट्री आफ अर्थ साइंस की ओर से अर्ली वार्निंग प्रोजेक्ट की जिम्मेदारी आईआईटी रुड़की को दी गई है, जिस पर करीब दो साल से काम चल रहा है। इसके तहत उत्तरकाशी से जोशीमठ तक करीब 110 किलोमीटर की दूरी में 90 सेंसर स्थापित किए गए हैं। लगाए गए सेंसर में एक दिन पहले आए चमोली में भूकंप का भी डाटा रिकार्ड हुआ है।