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डिग्री मिली मानो जहां मिल गया

Sat, 01 Oct 2016 12:26 AM IST
ब्यूूराो/ अमर उजाला रुड़की
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अाईअाईटी दीक्ष्‍ाांत समाराोह - फोटो : अमर उजाला ब्‍यूूराो
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रुड़की। आईआईटी जैसे शीर्षस्थ संस्थान से डिग्री हासिल करने का सपना ही अपने आप में मायने रखता है। लेकिन जब हकीकत में ऐसे मंच पर डिग्री मिले तो लगता है मानो सारा जहां मिल गया हो। कुछ ऐसे ही भाव संस्थान के वार्षिक दीक्षांत समारोह में डिग्री पाने वाले युवाओं के चेहरों पर दिखे।
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शुक्रवार को आईआईटी के दीक्षांत समारोह में 1091 बीटेक एवं इंटीग्रेटिड डुअल डिग्री, 922 पीजी डिग्री और 292 पीएचडी डिग्री को मिलाकर कुल 2305 छात्रों को डिग्री प्रदान की गई। इस दौरान पूरे संस्थान में सर्वाधिक सीजीपीए अंक पाने वाले बीटेक मैकेनिकल के छात्र आशिक मौहम्मद को प्रेजीडेंट गोल्ड मेडल पुरस्कार मिला। लेकिन वह पुरस्कार के दौरान उपस्थित नहीं थे। उसके बाद बीटेक कैमिकल एवं एमटेक इंटीग्रेटिड डुअल डिग्री के छात्र प्रतीक जयकुमार को डायरेक्टर्स गोल्ड मेडल, बीटेक के जैन पल्लव अनिल को द प्रेजीडेंट आफ इंडिया डा. शंकर दयाल शर्मा गोल्ड मेडल अवार्ड और कंप्यूटर साइंस एंड इंजीनियरिंग एवं एमटेक आईटी की इंटीग्रेटिड डुअल डिग्री के छात्र कुबेर दत्त शर्मा को डा. जय कृष्ण गोल्ड मेडल अवार्ड प्रदान किया गया।

अंबानी से डिग्री लेने का सपना अधूरा
रुड़की। मुकेश अंबानी के हाथों डिग्री पाने को लेकर छात्रों में जबरदस्त क्रेज था। लेकिन इस दौरान कुछ छात्रों का ही यह सपना पूरा हो पाया। अंबानी ने पहले पांच छात्रों और विशेषज्ञ वैज्ञानिकों को विशेष पुरस्कारों से नवाजा। उसके बाद उनकी उपस्थिति में पीएचडी के 292 छात्रों को डिग्री प्रदान की गई। लेकिन जैसे ही बीटेक, एमटेक के छात्रों को डिग्री देने की बारी आई तो संस्थान निदेशक ने उन्हें मंच पर संबोधन के लिए आमंत्रित किया। उसके बाद वे 28 मिनट में अपना संबोधन देने के बाद रवाना हो गए। इसके बाद संस्थान निदेशक एवं बीओजी चेयरमैन ने शेष छात्रों को डिग्री प्रदान की।
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मुकेश में अपना अक्स तलाशते रहे युवा
रुड़की। देश की सबसे बड़ी कंपनी के मालिक मुकेश अंबानी में युवा अपना अक्स तलाशते नजर आए। आईआईटी से ही सैकड़ों छात्रों ने रिलायंस में सेवाएं देकर अपना नाम कमाया है। वहीं रिलायंस इंडस्ट्रीज की नींव मुकेश अंबानी के पिता धीरू भाई अंबानी की ओर से की गई छोटी सी शुरूआत तक इस मुकाम पर पहुंची। इसे लेकर भी छात्र उन्हें देखने और सुनने के लिए लालायित थे। अपने भाषण के दौरान भी मुकेश अंबानी ने इस बात पर फोकस किया कि जिस तरह उनके पिता ने छोटे से प्रयास से बड़ा लक्ष्य हासिल किया उसी तरह उनमें भी वे सारी संभावनाएं मौजूद हैं।
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