झबरेड़ा विधासभा सीट से विधायक हरिदास को कांग्रेस से नजदीकियां भारी पड़ी। यही कारण है कि चुनाव से पहले उनका टिकट कट गया है, जिसकी पहले ही संभावना जताई जा रही थी। मालूम हो कि कांग्रेस की सरकार में शामिल होने के बाद बसपा से बेरुखी और अलग पार्टी बनाने का खामियाजा भी उन्हें उठाना पड़ा है। पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव इसे बसपा सुप्रीमों का निर्णय बता रहे हैं।
बसपा से पिछला विधानसभा चुनाव जीतने के बाद कांग्रेस की सरकार में शामिल हुए सुरेंद्र राकेश, हरिदास और शरबत करीब अंसारी को लेकर अक्सर कयास लगाए जाते रहे। सुरेंद्र राकेश और हरिदास की लगातार बढ़ती कांग्रेस से नजदीकियों के कारण ही बसपा सुप्रीमो ने इन्हें पार्टी से निलंबित भी किया था। इसके बाद हरिदास ने अलग पार्टी भी बनाई थी, लेकिन बाद में वे वापस बसपा में शामिल हो गए थे। कांग्रेस से नजदीकियों के कारण ही बसपा सुप्रीमों ने सुरेंद्र राकेश से भी किनारा कर लिया था। यही कारण है कि कांग्रेस सरकार में कैबिनेट मंत्री रहे सुरेंद्र राकेश के निधन के बाद उनकी पत्नी ममता राकेश ने कांग्रेस का दामन थाम लिया और कांग्रेस ही चुनाव लड़कर विधायक बनीं। एक ओर जहां बसपा को आंख दिखाने के बाद सुरेंद्र राकेश का कद बढ़ता गया वहीं दूसरी ओर हरिदास को एक के बाद एक झटका लगता रहा। स्थिति यह हुई कि विधायक हरिदास दो बार चुनाव लड़ाने के बाद भी अपने बेटे को क्षेत्र पंचायत सदस्य नहीं बना सके, जबकि उनके बेटे के खिलाफ चुनाव लड़कर भागमल के बेटे ने उन्हें शिकस्त दी। यही नहीं हरिदास के तमाम विरोध के बावजूद भागमल का बेटा ब्लाक प्रमुख भी चुना गया। इसके बाद हरिदास की भले ही बसपा में वापसी हो गई, लेकिन उनके टिकट कटने की संभावना बनी हुई थी, जो बुधवार को सच साबित हुई।
घोषणा से पहले अंजान ने हरिदास
हरिद्वार रोड पर आयोजित जनसभा में झबरेड़ा विधानसभा सीट पर भागमल का टिकट पक्का होने के बाद सबसे अधिक झटका हरिदास को लगा। पार्टी महासचिव की ओर से भागमल के नाम की घोषणा होते ही हरिदास का चेहरा उतर गया। इससे सहज ही अनुमान लगाया जा सकता है कि उन्हें पहले इसका अंदाजा नहीं था। बाद में उन्होंने पत्रकारों से बातचीत में स्वीकार किया, हालांकि रुंधे स्वर में उन्होंने पार्टी के निर्णय के साथ होने की बात कही।