बसपा से टिकट न मिलने पर कांग्रेस ज्वाइन करना भी हरिदास के काम नहीं आया। कांग्रेस ने झबरेड़ा सीट से राजपाल को टिकट देकर इनको बड़ा झटका दे दिया है। तीन बार के विधायक रहे हरिदास के सामने अब अपनी राजनीति बचाने की चुनौती होगी।
राज्य गठन के बाद बसपा की राजनीति में आए हरिदास दो बार लंढौरा और एक बार झबरेड़ा से विधायक बने। लेकिन, लगातार तीन बार विधायक बनने के बाद हरिदास को बसपा सुप्रीमो मायावती ने लोकसभा चुनाव के दौरान पार्टी विरोधी गतिविधियों के आरोप में निलंबित कर दिया था। कुछ समय पहले उनकी बसपा में वापसी भी हुई। उन्होंने अपने बेटे आदित्य ब्रजवाल को राजनीति में लाने के लिए ब्लॉक प्रमुख की कुर्सी पर बैठाने के उसे बीडीसी का चुनाव दोबारा लड़वाया। लेकिन, आदित्य जीत नहीं पाए। इससे बेटे को ब्लॉक प्रमुख की कुर्सी पर बैठाकर राजनीति की शुरूआत कराने में हरिदास फेल हो गए। इस झटके के बाद बसपा ने भी हरिदास को टिकट वितरण के दौरान झटका देते हुए उनका नाम काटकर झबरेड़ा से भागमल को प्रत्याशी बना दिया। इस पर हरिदास ने कांग्रेस में जाकर टिकट के लिए दांव चला।
एक बड़े समारोह में समर्थकों संग हरिदास को स्वयं मुख्यमंत्री हरीश रावत ने कांग्रेस की सदस्यता दिलाई। इससे हरिदास भी टिकट मिलने की उम्मीद करने लगे थे। लेकिन, कांग्रेस प्रत्याशियों की सूची फाइनल होने के बाद हरिदास के अंतिम दांव पर भी पानी फिर गया। यहां हरिदास की बजाय राजपाल को टिकट दे दिया। इससे हरिदास की कांग्रेस के टिकट पर झबरेड़ा से चौथी बार टिकट मिलने की अंतिम उम्मीदें धाराशायी हो गई। ऐसे में अब लगातार 15 साल विधायकी करने वाले हरिदास के सामने अपने राजनीति वजूद को बचाने एवं सक्रिय राजनीति में बने रहना उनके लिए चुनौतीपूर्ण होगा। अब बड़ा सवाल यह है कि हरिदास अगला कदम क्या उठाते हैं। इस संबंध में झबरेड़ा विधायक हरिदास का कहना है कि टिकट नहीं मिलने से अभी थोड़ा गम में हूं। मुझे थोड़ा समय दीजिए। इस मामले फिर बात करेंगे।