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अंधड़ से किसान के साथ आमजन भी हुआ परेशान

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रुड़की क्षेत्र में बीती रात आई आंधी के कारण विद्युत लाइन पर टूटकर गिरा पेड़। - फोटो : ROORKEE
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क्षेत्र में बृहस्पतिवार रात करीब आठ बजे आसमान में अचानक छाए बादलों से मौसम का मिजाज एकाएक बदल गया। एक ओर जहां अंधड़ से बिजली की लाइनों पर पेड़ और टहनियां गिरने से शहर से लेकर देहात तक बिजली आपूर्ति बंद हो गई। वहीं हल्की बूंदाबांदी से गेहूं की फसल की थ्रेसिंग का काम भी प्रभावित हुआ। भले ही अंधड़ कुछ देर बाद रुक गया हो और हल्की बूंदाबांदी हुई हो लेकिन इससे किसानों का काम दो से तीन दिन पीछे खिसक गया है। जिन लोगों के गेहूं कट गए थे, वे शुक्रवार को भी थ्रेसिंग का काम नहीं करवा पाए। वहीं बिजली गुल होने से कई इलाकों में रातभर अंधेरा छाया रहा। कुछ इलाकों में तो तीन से चार घंटे बाद सप्लाई शुरू हो गई जबकि कुछ इलाकों में अगले दिन सुबह लोगों को बिजली नसीब हुई।
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बूंदाबांदी से आगे खिसका थ्रेसिंग का काम
बीती रात करीब आठ बजे अचानक तेज हवा के साथ शुरू हुई हल्की बूंदाबांदी ने किसानों की धड़कनें बढ़ा दीं। बारिश से भले ही जमीन न भीगी हो लेकिन गेहूं की कटाई और थ्रेसिंग का काम बाधित जरूर कर दिया है। किसानों को अब गेहूं की थ्रेसिंग का काम एक से दो दिन पीछे करना पड़ गया है।
क्षेत्र में इस समय गेहूं की कटाई का काम चल रहा है। वहीं दो दिन से मौसम का मिजाज भी बिगड़ा हुआ है। ऐसे में किसानों की चिंता बढ़ी हुई थी। किसान जल्द से जल्द गेहूं की फसल को निपटाना चाहते हैं। इसी बीच बीती शाम अचानक आसमान में बादल छा गए। बादलों को देखकर लोगों ने गेहूं की कटाई के साथ ही थ्रेसिंग के काम में तेजी शुरू कर दी। रात करीब आठ बजे अचानक अंधड़ शुरू हो गया। कुछ जगह हवा के साथ बूंदाबांदी भी हुई। आंधी चलने से किसानों के खेत में कटी पड़ी गेहूं की फसल तितर-बितर हो गई। वहीं बूंदाबांदी से जो गेहूं की फसल कटने के बाद सूख चुकी थी उसमें नमी आ गई। इस नमी के चलते ये गेहूं मशीन में थ्रेसिंग होने लायक नहीं रहा। अब इस नमी को खत्म करने के लिए किसानों को एक से दो दिन गेहूं को ऐसे ही खेत में छोड़ना पड़ेगा। वहीं रात में आए अंधड़ से खेतों में फैला गेहूं किसानों ने शुक्रवार सुबह पहुंचकर एकत्र किया। किसान रवि कुमार, अंबरीष अग्रवाल, मनोज कपिल, सुखपाल सिंह आदि का कहना है कि आंधी और बूंदाबांदी से गेहूं कटाई का काम कुछ समय के लिए बाधित जरूर हुआ है।
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अंधड़ से उड़ी कई गांव और कालोनियों की बिजली
बीती रात आई तेज आंधी से एक बड़े इलाके की बिजली गुल हो गई। कई जगह लाइनों पर पेड़ और टहनियां गिरने सेे 70 से अधिक गांव की बिजली ठप हो गई। शहर में भी बिजली का एक खंभा टूटने और एक जगह केवल पंचर होने से लोगों को रातभर अंधेरे में रहना पड़ा।
बृहस्पतिवार रात करीब आठ बजे जैसे ही तेज हवा शुरू हुई तो एहतियात के तौर पर संवेदनशील बिजलीघरों से क्षेत्र में बिजली आपूर्ति बंद कर दी गई। इसके बाद हवा तेज हुई तो बिजली की लाइनों पर पेड़ और टहनियां गिर गए। सबसे ज्यादा दिक्कत ब्रह्मपुर बिजलीघर से जुड़े उपभोक्ताओं को आई। यहां कलियर से आ रही 33 हजार की लाइन में फाल्ट आ जाने से बिजलीघर बंद हो गया। इसके बाद करीब 12 बजे रामनगर से आ रही 33 हजार की लाइन से सप्लाई शुरू करनी पड़ी। इसके बावजूद कलियर, रुड़की, भारापुर, खंजरपुर फीडर में दिक्कत आने से इन्हें बंद करना पड़ा। ऐसे में इन फीडरों से जुड़े 70 गांव के लोगों को परेशानी हुई। इन गांवों में शुक्रवार सुबह आपूर्ति शुरू हो पाई। वहीं दूसरी ओर रात से डिफेंस कालोनी में बाधित बिजली आपूर्ति को ठीक करते समय एक खंभा टूट गया। इससे कालोनी सहित बीटीगंज में अंधेरा छा गया। रात करीब तीन बजे खंभा ठीक कर सप्लाई शुरू की गई। उधर, प्रेमनगर में भी आंधी आने से एक केबल पंचर हो गया। ऐसे में इससे संबंधित तीन ट्रांसफार्मर बंद हो गए। करीब 90 परिवारों को करीब तीन घंटे बिना बिजली के रहना पड़ा। ऊर्जा निगम अधिकारियों ने सुबह करीब 11 बजे तक शहर से लेकर देहात तक बिजली आपूर्ति शुरू कर दी थी।
400 परिवारों ने अंधेरे में बिताई रात
बूंदाबांदी शुरू होने के बाद ऊर्जा निगम ने एहतियातन पूरे लक्सर क्षेत्र की बिजली बंद कर दी। लगभग डेढ़ घंटे के बाद मौसम सामान्य हुआ तो रात करीब 9 बजे लक्सर बिजलीघर से विद्युत आपूर्ति चालू की गई लेकिन लक्सर के लक्सरी मोहल्ले में फाल्ट होने के कारण बिजली नहीं आई। मोहल्ले के अमित गिरी, नूरजहां, फखरे आलम, नौशाद, मेहरबान, तालिब खान, राकेश कुमार, कर्णपाल आदि लोगों ने बताया कि जेई और फिर एसडीओ को सूचना देने पर उन्होंने लाइनमैन भेजकर बिजली ठीक कराने का आश्वासन दिया था लेकिन कोई नहीं आया। बाद में अधिकारियों ने उनके फोन उठाकर बात तक नहीं की। लोगों ने ऊर्जा निगम के टोल फ्री हेल्पलाइन नंबर पर बताया। इसके बाद भी विद्युत आपूर्ति सुचारु नहीं हुई। सुबह 6 बजे आपूर्ति चालू की गई। जितेंद्र कुमार, राजू, नरेश चौधरी ने बताया कि मोहल्ले के ज्यादातर लोगों के घर में इनवर्टर नहीं लगा है। बिजली न आने से उन्होंने अपने मकान की छत पर बैठकर रात बिताई है। मोहल्ले के 400 परिवारों को पूरी रात छत पर बितानी पड़ी। इसे पूरे मोहल्ले के लोगों में रोष है। वहीं रेलवे स्टेशन पर भी 3 घंटे तक अंधेरा छाया रहा। उधर, लक्सर के एसडीओ अमीचंद का कहना है कि रात में भी मरम्मत की कोशिश की गई थी लेकिन फाल्ट मिलने में काफी समय लगा है। फाल्ट मिलते ही उसे ठीक करके आपूर्ति चालू कर दी गई है।
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