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बंदरों के आंतक से परेशान घाड़ क्षेत्रवासी

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घाड़ क्षेत्र के लोग बंदरों के उत्पात से परेशान हैं। हर समय हमले का खतरा बना रहता है। साथ ही खेतों में बोई गई फसलों को तहसनहस कर बंदर नुकसान पहुंचा रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि बंदरों से निजात के लिए विभागीय अधिकारी कोई कदम नहीं उठा रहे हैं। तमाम शिकायतों के बाद भी समस्या का समाधान नहीं हो रहा है।
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बुग्गावाला क्षेत्र के दर्जनों गांव में बंदरों का इस कदर उत्पात है कि ग्रामीण घर से बाहर निकलते में भी डरते हैं। कई बार तो बंदर घर में खाना खाते समय भी जानलेवा हमला कर चुके हैं। रास्ते में साइकिल और दोपहिया वाहनों से गुजरते समय भी राहगीरों पर हमला बोल देते हैं। कई वाहन चालकों को गंभीर चोट आ चुकी हैं। स्कूल जाने वाले छोटे बच्चों को भी बंदरों ने कई बार चोटिल कर दिया है। क्षेत्रवासियों के लिए बंदरों की बढ़ती आबादी बड़ी समस्या है। लोगों ने वन विभाग से बंदरों को पकड़वाने की गुहार लगाई है। वहीं, वन रेंज अधिकारी राम सिंह ने बताया कि कई बार बंदर पकड़ने वाली टीम बुलाई गई। कुछ बंदरों को पकड़कर रेस्क्यू सेंटर ले जाया गया। वहां से इन बंदरों को जंगल में छोड़ दिया जाता है। अब बंदरों की बढ़ती आबादी को देखते हुए रेस्क्यू सेंटर में बंदरों की नसबंदी का कार्यक्रम चलाया जा रहा है।
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खेतों में खड़ी फसल को बंदर नुकसान पहुंचा रहे हैं। घाड़ क्षेत्र के लोग वर्षों से बंदरों के आतंक से परेशान है, लेकिन कोई स्थायी समाधान नहीं हो रहा है।
-मेघपाल सैनी, किसान, तेलपुरा
स्कूल जाने वाले बच्चों पर बंदर हमला बोल देते हैं। इसके चलते बच्चे स्कूल जाने से भी डरते हैं। कई बच्चे बंदरों के हमले से घायल तक हो चुके हैं।
-कुशल पाल चौहान, ग्रामीण, तेलपुरा
मंदिर जाते समय बंदर श्रद्धालुओं के पीछे-पीछे भागते हैं। कई बार सामान लेने के लिए हाथ पर झपट्टा मारकर घायल कर देते हैं और कपड़े तक फाड़ देते हैं।
-कमल चौहान, किसान, तेलपुरा
ग्रामीण बंदरों के आतंक के चलते छत पर कपड़े नहीं सुखा पा रहे हैं। घर पर शांति से बैठकर खाना नहीं खा सकते। हर समय बंदरों के हमले का डर है।
-सोनू सैनी, किसान, बनवाला
खेतों में फसलों को नुकसान पहुंचा रहे बंदरों का आतंक किसानों की रोजी-रोटी छीन रहा है। खेतों में सब्जी समेत तमाम तरह फसलों को नुकसान हो रहा है।
-राजपाल चौहान, किसान, तेलपुरा
उच्च प्राथमिक विद्यालय में बच्चे आने से डर रहे हैं। स्कूल पहुंचते समय और पढ़ाई करते समय बंदर पहुंच जाते हैं। उनसे जान को खतरा बना रहता है।
-ओमी चौहान, किसान, तेलपुरा
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