रुड़की। किसानों की लड़ाई लड़ने में भारतीय किसान यूनियन (भाकियू) के आंदोलनों की एशिया के 11 देशों के किसानों ने भी सराहाना की है। इतना ही नहीं इन देशों ने भाकियू की राह पर निकलकर अपने देशों के किसानों की लड़ाई लड़ने का निर्णय लिया है। हाल ही में श्रीलंका में आयोजित चार दिवसीय किसान सम्मेलन में भाकियू ने प्रतिभाग कर इसका नेतृत्व भी किया।
श्रीलंका में 11 से 14 जनवरी तक आयोजित किसान सम्मेलन में भारत, नेपाल, बांग्लादेश, फिलीपींस, दक्षिण कोरिया, पाकिस्तान, श्रीलंका, इंडोनेशिया और थाईलैंड समेत एशिया के 11 देशों के किसानों ने भाग लिया। भारत की ओर से भाकियू के प्रतिनिधिमंडल के युवा नेता चौधरी गौरव टिकैत के नेतृत्व में हरिद्वार के जिलाध्यक्ष विजय कुमार शास्त्री समेत पांच सदस्यों ने प्रतिभाग किया था। शास्त्री ने बताया कि सम्मेलन की शुरुआत किसान नेता महात्मा चौधरी महेंद्र सिंह टिकैत को श्रद्धांजलि देकर की गई। सम्मेलन में सभी देशों के किसानों ने कहा कि भाकियू भारत में किसानों की आवाज जिस तरीके से बुलंद करती है, उससे प्रेरणा लेकर हम भी अपने देशों के किसानों की आवाज बुलंद करेंगे। सम्मेलन में सभी देशों ने कृषि संकट पर असंतोष जताया। साथ ही इससे मुक्ति के लिए एकजुट होकर कार्य करने की बात कही। उन्होंने बताया कि सम्मेलन में पांच प्रस्ताव भी पास किए गए। इसमें युवाओं का खेती से पलायन किस तरह रोका जाए, विश्व व्यापार समझौते को खेती से बाहर रखा जाए, ग्रामीण स्तर पर उद्योग लगाए जाएं, क्षेत्रीय व्यापक आर्थिक भागीदारी को किसानों पर न थोपा जाए, किसानों को नकद सब्सिडी शामिल है। पांचों प्रस्तावों पर अपने-अपने देश में लड़ाई लड़ने का निर्णय लिया गया।