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Roorkee News: फसलों की लागत कम करेगी टपक-फव्वारा सिंचाई पद्धति

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Iप्रधानमंत्री ध्वज वाहक योजना से किसानों को लाभांवित कर रहा उद्यान विभाग
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Iयोजना के अंतर्गत किसान 55 फीसदी अनुदान पर लगवा सकता है उपकरणI

उद्यान विभाग की प्रधानमंत्री सूक्ष्म सिंचाई के अंतर्गत प्रधानमंत्री ध्वज वाहन योजना के तहत किसानों को टपक और फव्वारा सिंचाई पद्धति का इस्तेमाल करने के लिए प्रेरित किया जा रहा है। योजना का लाभ उठाकर किसान जहां एक तरफ पानी की बचत करेगा, वहीं खेत को खरपतवार और अन्य बीमारियों से भी बचाएगा।



उद्यान विभाग समय-समय पर अनेक योजनाएं चलाकर बागवानों को लाभांवित करता रहता है। इसी तरह उद्यान विभाग बागवानों को प्रधानमंत्री सूक्ष्म सिंचाई कार्यक्रम के तहत प्रधानमंत्री ध्वज वाहन योजना से लाभांवित कर रहा है। इसके तहत किसानों को सूक्ष्म सिंचाई के लिए प्रेरित करने को टपक और फव्वारा योजना का लाभ दिया जा रहा है। खास बात ये है कि इस योजना का फायदा बागवानी करने वाले, फूल और सब्जियां उगाने वाले किसानों को ही दिया जा सकता है।
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बता दें कि इस समय जिले में दस हजार से अधिक किसान उद्यान विभाग से जुड़े हैं। ये किसान योजना का लाभ उठा सकते हैं। मुख्य उद्यान अधिकारी ओम प्रकाश सिंह ने बताया कि ध्वज वाहक योजना के तहत किसानों को सूक्ष्म सिंचाई के लिए प्रेरित किया जा रहा है। इसमें किसान टपक और फव्वारा योजना लेकर कम पानी से अधिक सिंचाई कर सकते हैं।



ये योजना वहां अधिक कारगर हैं जहां खेत में पानी काफी दूर से लाना पड़ता है या जिनके खेत उबड़-खाबड़ हो। आम, लीची, अमरूद आदि के बागों में ड्रीप योजना कारगर है। इससे पाइपों के माध्यम से पौधे की जड़ में ही पानी पहुंचाया जाता है।

जबकि फूल और सब्जियों में स्प्रिंकलर योजना कारगर होती है। इसमें फसल के बीच पाइप बिछाकर फव्वारे के माध्यम से फसलों की सिंचाई की जाती है। किसानों को दोनों ही योजनाओं के लिए 55 फीसदी अनुदान दिया जा रहा है।
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Iकीटनाशक दवाओं के छिड़कने में आसानीI

इस योजना के बाद किसानों को कीटनाशक दवाओं के छिड़कने से छुटकारा मिल जाएगा। किसानों को दवाओं के छिड़काव के लिए मशीन आदि लाने की जरूरत नहीं पड़ेगी। इसके बाद किसानों को कीटनाशक दवा बस घोलकर इस पाइप में डालना है। पानी के माध्यम से दवा हर पौधे तक पहुंच जाएगी। वहीं इस योजना के बाद खेत में खरपतवार भी बहुत कम हो जाएगी और कीटपतंग भी कम होंगे क्योंकि अधिकतर खरपतवार और कीटपतंग पानी से पैदा होते हैं। जबकि इस योजना के बाद खेत में जरूरत के हिसाब से पानी जाएगा।
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