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86 साल से रह रहे ग्रामीणों को गांव छोड़ने का फरमान

Thu, 19 Jan 2017 10:34 PM IST
संदीप राठौर बुग्गावाला
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मेहनत मजदूरी कर पेट पाल रहे वन ग्राम हरिपुर टोंगिया के 15 परिवारों को गांव छोड़ने के लिए वन विभाग की ओर से नोटिस जारी किया गया है। जिसमें काश्तकारी जमीन से विहीन लोगों को 15 दिन के भीतर गांव छोड़कर चले जाने का फरमान सुनाया गया है। इन लोगों का कहना है कि वे 86 सालों से इस गांव में रह रहे हैं। पहले ही उन्हें गांव में घर और जमीन का मालिकाना हक नहीं दिया गया है। अब गांव और घर छुट जाएगा तो वे कहां रहेंगे।

घाड़ क्षेत्र बुग्गावाला के समीप खानपुर रेंज में हरिपुर टोंगिया गांव है। वन क्षेत्र के अंतर्गत होने के कारण इसे वन ग्राम कहा जाता है। यहां करीब 350 परिवार रहते हैं। इस गांव के लोगों को आजादी के बाद से न तो पंचायत चुनाव में शामिल होने का मौका मिला है और न ही इस गांव में प्रधान का चुनाव होता है। यही नहीं करीब 86 साल से यहां रहकर किसी तरह गुजर बसर कर रहे लोगों को आज तक उनके घर और जमीनों का मालिकाना हक भी नहीं मिला है। जिन घरों में लोग रहते हैं, और खेत की जमीनों की वे जुताई करती है। वास्तव में ये घर और जमीन वन विभाग के नाम है।  अब वन विभाग के एक नोटिस ने 15 परिवारों पर और भी वज्रपात कर दिया है। जिसके चलते  इन पर गांव छोड़ने की नौबत आ गई है। पहले से ही गरीब इन लोगों को यदि गांव छोड़ना पड़ा तो ये लोग सड़कों पर आ जाएंगे। 11 जनवरी को वन क्षेत्राधिकारी की ओर से जारी नोटिस में कहा गया है कि उनके पास काश्तकार होने का कोई प्रमाण हो तो उपलब्ध कराएं नहीं तो 15 दिन के अंदर भूमि खाली कर दें। इससे ग्रामीणों में रोष है।
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1930 में वनीकरण के लिए बसाए थे परिवार
ग्रामीण शिवकुमार, राकेश कुमार, रवि कुमार, बुध सिंह, जरनैल सिंह आदि ने बताया कि आजादी से पहले अंग्रेजों ने वन क्षेत्र में वनीकरण आदि के लिए आसपास से लोगों को यहां लाकर बसाया था। उन्हें घर और खेती के लिए जमीन भी दी गई। लेकिन उस समय उन्हें घर और खेती का मालिकाना हक नहीं दिया गया। जब देश आजाद हो गया उसके बाद भी वे मालिकाना हक से वंचित है और अब इतने सालों से यहां रह रहे 15 परिवारों को गांव से बाहर निकालने की कोशिश की जा रही है। इसे लेकर ग्रामीणों में सरकार और जनप्रतिनिधियों के प्रति रोष है और विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। साथ ही ग्रामीण शासन प्रशासन से लेकर प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति तक को ज्ञापन भेज चुके हैं। लेकिन कोई सुनवाई नहीं हो रही है।
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