चुनावी शोर में बेटी को दो लाख रुपये मिलने की अफवाह के बीच शहर से देहात तक मंगलवार को सैकड़ों फार्म भर कर स्पीड पोस्ट से बाल विकास मंत्रालय नई दिल्ली को भेजे गए। फार्म लेने के लिए दिनभर फोटो स्टेट की दुकानों और इन्हें भेजने के लिए डाकघरों में भीड़ रही, लेकिन किसी भी विभाग के अधिकारी को योजना की जानकारी नहीं हैं। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि आखिर फार्म आए कहां से।
मंगलवार सुबह शहर से देहात तक अफवाह उड़ी कि प्रधानमंत्री की ओर से ‘बेटी-बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ योजना के तहत दो लाख रुपये दिए जाएंगे। योजना का लाभ आठ वर्ष से 32 वर्ष तक की सभी बेटियां उठा सकती हैं। इसके लिए एक फार्म भरकर बाल विकास मंत्रालय नई दिल्ली भेजा जा रहा है। फार्म भरने की अंतिम तिथि 31 जनवरी बताई गई। जिसके कान में भी यह अफवाह पड़ी वह फार्म के लिए बाजार और संपर्क सूत्रों की ओर दौड़ पड़ा। फार्म के लिए फोटो स्टेट की दुकानों में भारी भीड़ जुटी। फार्म स्पीड पोस्ट एवं रजिस्ट्री करने के लिए अभिभावकों की डाकघरों में लाइनें लगी रहीं।
रामनगर पोस्ट ऑफिस से मंगलवार को करीब 275 फार्म स्पीड पोस्ट किए गए। सिविल लाइंस स्थित डाकघर की मुख्य शाखा से भी सैकड़ों फार्म अभिभावकों ने स्पीड पोस्ट किए। भगवानपुर क्षेत्र में भी अभिभावकों की ओर से ऐसे फार्म भरकर जमा किए। अभिभावकों ने फार्म भरकर ग्राम प्रधान एवं पार्षदों से प्रमाणित भी करवाए, लेकिन जब फार्म के बारे में विभागीय कार्यालय से पूछताछ की गई तो वहां ऐसी किसी योजना की जानकारी होने से साफ इनकार किया गया। इस संबंध में भगवानपुर सीडीपीओ कार्यालय में तैनात कर्मचारी अरुण कुमार ने बताया कि ऐसी किसी योजना का न तो कोई उनके पास जीओ है और न जानकारी है। इतना जरूर पता चला है कि लोगों की ओर से फार्म भरकर पोस्ट ऑफिस में सीधे दिल्ली भेजा जा रहा है।
फार्म भरकर मेरे पास सुबह से लोग मुहर एवं साइन कराने के लिए आने लगे थे, लेकिन मैंने अधिकारियों से पता किया तो ऐसी किसी योजना के होने के बारे में सभी ने इनकार किया। अब मामले की शिकायत ज्वाइंट मजिस्ट्रेट से की जाएगी।
पंकज सतीजा, पार्षद रुड़की नगर निगम
कहां से आए फार्म
बेटी को दो लाख रुपये मिलने के लिए फार्म भरवाने की अफवाह शहर एवं देहात में चर्चा का विषय बनी रही, क्योंकि फिलहाल चुनाव का दौर चल रहा है और ऐसे में ऐसी किसी योजना के अचानक से फार्म आने से कई सवाल खड़े होते हैं, जिनके सवाल लोग एक दूसरे से पूछते भी रहे। सवाल राजनीतिक दलों की तरफ भी उठ रहे हैं। आशंका जताई जा रही है कि कहीं किसी राजनीतिक व्यक्ति ने चुनावी फायदा लेने के लिए तो ऐसा नहीं किया।