रुड़की। हरिद्वार जिले के बागवान बहुत जल्द आम, अमरूद, लीची की तरह पपीता और कीवी की खेती कर अपनी आय बढ़ा सकेंगे। बागवानों की मांग पर उद्यान विभाग इस बार सब्सिडी योजना में पपीता और कीवी के फल को भी शामिल करने जा रहा है। विभाग ने इसके लिए खेतों के सर्वे आदि को लेकर तैयारियां शुरू कर दी हैं। जल्द ही किसानों से योजना के लिए आवेदन मांगे जाएंगे।
इस समय रुड़की क्षेत्र में करीब 2600 हेक्टेयर भूमि पर बागवानी हो रही है। इसमें मुख्य रूप से आम, अमरूद, लीची, नाशपाती, आंवला, नींबू आदि फल शामिल हैं। करीब 1250 हेक्टेयर में आम, 1150 हेक्टेयर में अमरूद और 200 हेक्टेयर में लीची के बाग हैं। इधर कुछ वर्षों में पपीते और कीवी की अचानक मांग बढ़नी शुरू हो गई है। लिहाजा हरिद्वार के किसानों ने भी इन दोनों फलों का बाग लगाने का मन बना लिया है। किसानों की मांग को देखते हुए उद्यान विभाग ने जिले में पपीता और कीवी की फसल को सब्सिडी योजना में शामिल करने का प्रस्ताव मुख्यालय को भेजा है। ज्येष्ठ उद्यान निरीक्षक राजेश प्रसाद रमोला ने बताया कि जिले में पपीते की बागवानी का बड़ा स्कोप है। किसान पपीते और कीवी की बागवानी कर कम लागत में ज्यादा मुनाफा कमा सकते हैं। जल्द ही मुख्यालय से दोनों फलों की बागवानी के लिए मंजूरी मिलने की उम्मीद है। संवाद
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उद्यान विभाग 50 फीसदी देता है सब्सिडी
योजना के तहत बागवानी के लिए उद्यान विभाग खर्च का 50 फीसदी सब्सिडी देता है। इसके अलावा दवाई, खाद, निराई और गुड़ाई के लिए यंत्र भी दिए जाते हैं। योजना का लाभ लेने के लिए बागवानों को जमीन की नकल और आधार कार्ड देना पड़ेगा।
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पपीते के साथ उगा सकते हैं अन्य फसलें
पपीते के साथ किसान अन्य फसलें उगाकर दोहरी कमाई कर सकते हैं। बागवानी के दौरान किसान पपीते के पौधों में चार से दस फीट का फासला देकर भिंडी, मिर्च, बैंगन आदि की खेती कर सकते हैं। सबसे बड़ा फायदा यह है कि किसान हर तीन साल में पपीते की खेती के लिए जगह बदल सकते हैं। इससे खेती में फसल चक्र चलता रहता है तो वहीं भूमि की उर्वरा शक्ति भी बढ़ती रहती है। ज्येष्ठ उद्यान निरीक्षक राजेश प्रसाद रमोला ने बताया कि जैसे आम का एक पेड़ 80 साल तक फल देता है, वैसे ही पपीते का एक पौधा तीन साल तक फल देता है। तीन साल बाद भी फल आते हैं, लेकिन इसके बाद पैदावार कम होता चला जाता है।
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कीवी से मोटा मुनाफा ले सकेेंगे किसान
वैसे तो कीवी की खेती पहाड़ी इलाकों में ज्यादा होती है, लेकिन हरिद्वार में योजना शुरू करने के लिए कीवी की ऐसी किस्म तैयार की जा रही है जो मैदानी इलाकों में भी हो सके। ज्येष्ठ उद्यान निरीक्षक राजेश प्रसाद रसोला ने बताया कि कीवी का पौधा अंगूर की बेल की तरह होता है। एक हेक्टेयर जमीन पर 400 पौधे लगाए जाते हैं। एक पौधे पर एक बार में अनुमानित 30 से 40 किलो फल लगता है। ये बाजार में 100 से 150 रुपये किलो तक आसानी से बिक जाता है। उन्होंने बताया कि पैदावार बढ़ने पर दूसरे प्रदेशों में भी इसकी आसानी से सप्लाई की जा सकती है। ऐेसे में किसान कीवी की बागवानी कर बड़ा मुनाफा कमा सकते हैं।