ब्यूरो/अमर उजाला, रुड़की
क्षेत्र में आठ साल पहले तक कच्ची शराब का इतने बड़े पैमाने पर इस्तेमाल नहीं होता था, लेकिन 2010 के बाद आसपास क्षेत्रों में फैक्ट्रियाें के स्थापित होते ही अवैध शराब का कारोबार भी बढ़ने लगा। ग्रामीणों की मानें तो फैक्ट्रियों में काम करने वाले लोग ठेकेदार प्रथा के तहत बहुत कम वेतन पर नौकरी कर रहे हैं। वेतन बहुत कम होने के चलते शराब की लत में पड़े लोग कच्ची शराब से ही अपने शोक पूरे करते हैं। यही वजह है कि यहां अवैध शराब का कारोबार फल-फूल रहा है।
औद्योगीकरण के बाद से आसपास के गांवों के बड़ी संख्या में लोग फैक्ट्रियों में नौकरी करने जा रहे हैं। ग्रामीणों के अनुसार बिंडुखड़क गांव में करीब 120, भल्सवागाज में 200 तथा बाल्लुपुर गांव में 100 के आसपास लोग इन्हीं फैक्ट्रियों में नौकरी करने जाते हैं। बिंडुखड़क निवासी अमरीश कुमार और बिजेंद्र कुमार ने बताया कि ज्यादातर नौकरी कर रहे लोग ठेकेदारी प्रथा के तहत फैक्ट्रियों में काम कर रहे हैं। जिन्हें प्रतिमाह छह से सात हजार रुपये तक मिल पाते हैं। ऐसे में लोग नौकरी तो कर रहे हैं लेकिन इतने पैसों से जरूरत भी पूरी नहीं हो पाती। ऐसे में अपने बच्चों को पढ़ाकर उन्हें आगे बढ़ाने और बेहतर जिंदगी की नींव तैयार करने पर उनका जोर नहीं है। ग्रामीणों का कहना था कि शराब की लत में पड़ चुके ये लोग इस जहर को ही पी रहे हैं। शराब माफिया भी इन्हें सस्ते दर पर अवैध शराब बेचकर मुनाफा कमा रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है लोगों को शराब की लत के छुटकारे के लिए बेहतर रोजगार की व्यवस्था के साथ-साथ जागरूकता का संचार करना होगा। ग्रामीण बताते हैं कि पिछले करीब एक साल से स्थिति और भी ज्यादा बदतर हो चली थी।