रुड़की/खानपुर। अगर बड़ा ऑर्डर मिलता है तो शराब जल्दी भी तैयार की जा सकती है। जल्दी शराब तैयार करने से उसमें कुछ कमी रह जाती है। यही कमी शराब को जहरीला बना देती है, जिससे वह मानव शरीर को नुकसान देती है। सूत्रों के अनुसार मौत के इस सामान को तैयार करने में गुड़, पानी, केमिकल, यीस्ट यानी खमीर बनाने के काम आने वाला बेकिंग पाउडर के साथ ही यूरिया जैसे खतरनाक केमिकल का भी इस्तेमाल किया जाता है।
नाम न छापने की शर्त पर इस कारोबार से जुड़े एक व्यक्ति ने बताया कि अगर बड़ा ऑर्डर मिलता है तो कच्ची शराब जल्दी भी तैयार की जा सकती है। जबकि अगर कोई अच्छी क्वालिटी की शराब की मांग करता है तो उसे अच्छी क्वालिटी की शराब बनाकर दी जाती है, लेकिन उसमें समय अधिक लगता है और वह महंगी बेची जाती है। सूत्र ने बताया कि कच्ची शराब तैयार करने के लिए 40 किलो का एक गुड से भरा हुआ बोरा बाजार में मिलता है। 40 किलोग्राम गुड़ के सापेक्ष तीन गुना 120 लीटर पानी भरा जाता है। गुड़ और पानी को मिक्स कर उसमें एक गाच्छी (ब्रेड और रस्क तैयार करने में लगने वाला केमिकल) आधी किलो की टिक्की डाली जाती है। यह गाच्छी नाम की टिक्की पानी और गुड़ में जामन (जैसे दूध में जामन लगाया जाता है) का काम करती है। इसके बाद अगर अच्छी क्वालिटी की शराब तैयार करनी है तो इसे 15 दिन तक सड़ाया जाता है और अगर शराब जल्दी तैयार करनी है तो इसे तीन दिन तक ही सड़ाया जाता है। इसके बाद इस ड्रम को भट्टी पर चढ़ा दिया जाता है। इसके ऊपर एक बड़ा बर्तन (पतीला) रखते हैं। पतीले में एक बारीक छेद ड्रम में खुलता है। पतीले में छेद के ऊपर अंदर एक मिट्टी का ढक्कन रखा जाता है। मिट्टी के ढक्कन में से एक प्लास्टिक का पाइप (नली) बाहर आती है। पतीले के ऊपर एक ठंडे पानी का भिगोना चढ़ाया जाता है। जब भट्टी में आग जलाई जाती है तो ड्रम से भाप के रूप में शराब पतीले में लगी नली के द्वारा बाहर बोतल में आती रहती है और भिगोने के पानी को बार-बार बदला जाता है ताकि ज्यादा से ज्यादा शराब निकाली तैयार की जा सके।
दस किलो गुड़ से तैयार हो जाती है 20 बोतल शराब
शराब बनाने के जानकारों की मानें तो दस किलोग्राम गुड़ से 20 बोतल शराब तैयार की जाती है, जिसकी कीमत हजारों में होती है। मोटे मुनाफे का यह धंधा गांवों में जगह-जगह फल फूल रहा है। बताया जाता है कि अगर शराब को जल्दी तैयार करना हो तो पानी और गुड़ के मिक्सर में गाच्छी और एक किलोग्राम खेतों में डालने वाला यूरिया खाद डाला जाता है, जिससे सहाड़ा जल्दी तैयार हो जाता है। यह शरीर के लिए बेहद खतरनाक होता है। इसके अलावा ऑक्सीटोसिन भी मिलाया जाता है, जिससे जल्दी एल्कोहल बनता है, जो स्वास्थ्य के लिए हानिकारक होता है।