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30 रियाल चुकाने पर हवाला में तब्दील हो जाती है रकम

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अंकित कुमार गर्ग
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रुड़की। सऊदी अरब में घर बैठे बिठाए रकम हवाला में तब्दील हो जाती है। हवाला नेटवर्क से जुड़े एजेंट दस हजार रुपये तक की रकम भारत स्थित परिजनों को पहुंचाने के लिए 30 रियाल यानी भारतीय मुद्रा के हिसाब से करीब 500 रुपये वसूलते हैं। इसके बाद न बैंक में जाने का झंझट और न मनी ट्रांसफर होने का इंतजार होता है। खास बात यह है भारत में बैठे हवाला कारोबारी फोन के चंद घंटों बाद उनकी रकम परिजनों तक पहुंचा देते हैं। यही एक बड़ा कारण है कि सऊदी अरब में नौकरी कर रहे युवा आसानी से हवाला कारोबारियों से जुड़ जाते हैं, लेकिन देश की सुरक्षा के लिए खतरा बन चुका हवाला नेटवर्क इसी तरह आतंकी गतिविधियों को भी आसानी से संचालित कर सकता है।
रुड़की से करीब दस किलोमीटर दूर स्थित लंढौरा कस्बा क्षेत्र के छोटे से गांव बुक्कनपुर में जिस तरह से हवाला के जरिए घरों तक रकम पहुंच रही है। यह देश की सुरक्षा के लिए गंभीर है। यह कहना अतिश्योक्ति नहीं होगी। रविवार को जब एनआईए टीम गांव पहुंची तो सभी के मन में यह सवाल था कि आखिर हवाला कारोबारियों से यहां के अब्दुल सबद के तार कैसे जुड़े। गांव पहुंचकर जानकारी ली तो इसमें कई दिलचस्प खुलासे भी हुए। हाल ही में सऊदी में नौकरी कर लौटे करीब 18 वर्षीय युवक ने बताया कि सऊदी में जहां वह रहते थे, वहीं पर कुछ एजेंट पहुंचते थे। वह उनसे करीब 30 रियाल लेकर बाकी की रकम को परिजनों तक पहुंचा देते थे। उनके लिए यह इसलिए आसान था क्योंकि बैंक में पैसा जमा कराने पर तीन दिन बाद पैसा ट्रांसफर होता था। इसके बाद भारत में भी बैंक से रकम हासिल करने में तीन से चार दिन का समय लग जाता है।उस पर भी बैंक की छुट्टी हो तो यह समय बढ़ जाता है। ऐसे में घर बैठे बिठाए चंद घंटों में रकम पहुंचने के लालच में अक्सर सभी लोग इसी तरह अपने परिजनों को रकम पहुंचाते रहे हैं। सऊदी अरब की मुद्रा रियाल भारतीय करेंसी के करीब 17 रुपये के बराबर है। ऐसे में यदि दस हजार रुपये घर भेजने होते हैं तो करीब 500 रुपये हवाला एजेंट को देने होते हैं, लेकिन सवाल यह है कि जब इस छोटे से गांव में भी हवाला की रकम आसानी से पहुंच रही है तो इस बात की तस्दीक जरूरी हो जाती है कि इसी तरह की रकम कहीं देश विरोधी गतिविधियों के लिए आसानी से तो नहीं पहुंच रही है।
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मुजफ्फरनगर से जुड़े है हवाला कारोबार के तार
रुड़की। गिरफ्तार बुक्कनपुर निवासी अब्दुल समद ने एनआईए टीम को पूछताछ में कई अहम जानकारियां दी हैं। सूत्रों ने अनुसार अब्दुल ने मुजफ्फरनगर में हवाला कारोबार में जुड़े कुछ सुनारों के नामों का खुलासा किया है। बताया गया है कि मुजफ्फरनगर में हवाला का मोटा कारोबार करने वाले आका उसे रकम देते थे, जिसे अब्दुल को संबंधित लोगों तक पहुंचाना होता था। पिछले दिनों एनआईए टीम की ओर से इन पर शिकंजा भी कसा है।
अब्दुल समद का फुलास, देवबंद निवासी मामा का बेटा गुलनवाज सऊदी अरब में नौकरी करता है। बताया गया है कि पिछले करीब एक साल से अब्दुल भी देवबंद में रहकर कास्मेटिक का काम करने लगा था। मामा के लड़के के जरिए ही वह भेजी गई रकम को सऊदी अरब में नौकरी कर रहे युवकों के परिजनों को रकम देता था। सूत्रों के अनुसार इसी बीच उसे मुजफ्फरनगर में हवाला कारोबार करने वाले कुछ सुनारों से संपर्क हुआ। इसके बाद सुनारों की ओर से भी उसे हवाला की रकम दी जाने लगी। जिसे वह रुड़की और देवबंद क्षेत्र के लोगों को पहुंचाता था। अब्दुल के पिता राशिद की मानें तो अब्दुल जिन लोगों से रकम लेता और जिन्हें वह रकम देता था, उसका पूरा विवरण वह डायरी में लिखता था। राशिद ने बताया कि उसका बेटा पांच माह से इस काम को कर रहा था। कई बार उसने यह काम करने के लिए मना भी किया था, लेकिन सूत्रों की मानें तो एनआईए टीम ने जांच पड़ताल में यह भी पाया है कि अब्दुल को हवाला के जरिए साढ़े तीन लाख रकम मिली थी। जिसका इस्तेमाल आतंकी गतिविधियों के लिए हुआ है। हालांकि अभी तक इसकी अधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है, लेकिन इतना तय है कि अब्दुल हवाला की रकम को इधर से उधर भेजने का काम कर रहा था। यह बात और है कि मुजफ्फरनगर में बैठे उसके आका कोई बड़ा गेम खेल रहे थे। जब एनआईए को हवाला के इस नेटवर्क की जानकारी हुई तो 17 नवंबर 2017 को एनआईए ने मुजफ्फरनगर में इस बाबत मुकदमा भी दर्ज कराया था। तब से एनआईए इस नेटवर्क की जांच पड़ताल में जुटी थी।
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हवाला के जरिए कई अन्यों को भी पहुंच रही है रकम
रुड़की। बुक्कनपुर गांव में एक दर्जन से अधिक लोग सऊदी अरब में रहकर नौकरी कर रहे हैं। सूत्रों के अनुसार बैंकिंग और टैक्स आदि से बचने के लिए यह सभी लोग अपने परिजनों को हवाला के जरिए ही रुपये भेज रहे हैं। बताया गया है कि अब्दुल भी सऊदी अरब स्थित अपने मामा के बेटे गुलनवाज के अलावा वहां नौकरी कर रहे अन्य लोगों की रकम हवाला के जरिए मंगाता था और उनके परिजनों को सौंप देता था, लेकिन सवाल इस बात का है कि यदि सरकार की आंखों में धूल झोंककर हवाला के जरिए विदेश से रुपये मंगाए जा रहे हैं तो इस रकम का आतंकी हाथों में आने में भी कोई देर नहीं लगेगी।
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