रुड़की। इस बार दशहरे पर बुराई के प्रतीक रावण के पुतले के साथ कोरोना भी जलकर राख हो जाएगा। इसी कामना और भाव के साथ श्रीरालीला बीटी गंज समिति कोरोना वायरस का 25 फीट ऊंचा पुतला भी तैयार करवा रही है। चरथावल, मुजफ्फरनगर के कारीगर पुतलों को आकार देने में जुटे हैं। खास बात यह है कि इस बार रावण के पुतले के मुंह पर मास्क और हाथ में सैनिटाइजर की बोतल होगी।
कोरोना महामारी ने पूरी दुनिया को झकझोर दिया है। इसका असर धार्मिक आयोजनों पर भी पड़ा है। इसके चलते इस बार रुड़की में सिर्फ एक रामलीला का मंचन हो रहा है। कम बजट होने के बाद भी रामलीला के आयोजकों के उत्साह में कमी नहीं है। हर बार की ही तरह इस बार भी यहां रावण के पुतले का दहन होगा। हालांकि, इस बार पुतले की ऊंचाई घट गई है। खास बात यह है कि जिस कोरोना का असर धार्मिक आयोजनों पर पड़ रहा है, उस वायरस को खत्म करने की कामना के साथ इस बार रावण के पुतले के साथ कोरोना वायरस के पुतले के दहन की भी योजना बनाई गई है। बीटीगंज रामलीला समिति के महामंत्री सौरभ सिंघल ने बताया कि इस बार 50 फीट ऊंचा रावण का पुतला तैयार कराया जा रहा है। साथ ही 25 फीट का कोरोना का पुतला भी बनाया जा रहा है। रावण के साथ ही कोरोना के पुतले का भी दहन किया जाएगा।
रावण के पुतले के मुंह पर मास्क और हाथों में सैनिटाइजर भी होगा। नेहरू स्टेडियम में दोनों पुतलों को तैयार कर रहे चरथावल, मुजफ्फरनगर के कारीगर मोहम्मद नौशाद, इमरान, अमजद ने बताया कि इस बार कहीं पर भी पुतला नहीं बनवाया जा रहा है। केवल रुड़की में ही उन्हें ऑर्डर मिला है, जिससे वे बहुत खुश हैं। उन्होंने बताया कि इस बार काम का दबाव कम है और इत्मिनान के साथ पुतले तैयार किए जा रहे हैं। उन्हें रावण और कोरोना के पुतले बनाने का ऑर्डर मिला है। वहीं, रामलीला समिति के पदाधिकारियों ने बताया कि पुतले को बनाने में 50 हजार से अधिक का खर्च आएगा। हर साल की परंपरा को जीवित रखने के लिए सभी आयोजनों को करने की पूरी कोशिश की जा रही है।