रुड़की। बाल विकास विभाग की ओर से अनेक योजनाओं को संचालित किए जाने के बावजूद शहर में बच्चे कुपोषण का शिकार हो रहे हैं। बच्चों के कुपोषण का शिकार होने की सबसे अहम वजह अभिभावकों की लापरवाही और जागरूकता का अभाव है। इस समय रुड़की क्षेत्र में करीब 376 बच्चे कुपोषण का शिकार हैं। माता-पिता केवल दूध पिलाकर या दाल का पानी और चावल का पानी पिलाकर ही संतोष कर लेते हैं, जबकि बच्चों के खानपान पर विशेष ध्यान देना चाहिए।
इस समय बाल विकास विभाग की ओर से राष्ट्रीय पोषाहार माह चलाया जा रहा है। इसमें विभाग की ओर से गर्भवती महिलाओं को अपने और बच्चों की तंदुरुस्ती बनाए रखने के लिए खानपान आदि की जानकारी दी जा रही है। इसके अलावा बाल विकास विभाग की ओर से अनेक कल्याणकारी योजनाएं संचालित की जा रही हैं। इसमें गर्भवती महिलाओं से लेकर धात्री और डिलीवरी के बाद बच्चों को पौष्टिक सामग्री दी जा रही है। इसके बावजूद गांव से लेकर शहर तक में बच्चे कुुपोषण का शिकार हो रहे हैं। रुड़की क्षेत्र में बाल विकास विभाग शहरी, ग्रामीण प्रथम और ग्रामीण द्वितीय नाम से कार्यालय हैं। वर्तमान में इन तीनों में कुपोषित बच्चों की संख्या 376 है। इनमें अति कुपोषण की श्रेणी में करीब 120 बच्चे दर्ज हैं। बच्चों के कुपोषण होने की सबसे पहली वजह अभिभावकों का लापरवाह होना है। अक्सर देखने में आता है कि अभिभावक बच्चों के खानपान पर विशेष ध्यान नहीं देते हैं। केवल दूध पिलाकर या दाल का पानी और चावल का पानी पिलाकर ही इतिश्री कर लेते हैं। इसके अलावा बच्चों के वजन और लंबाई पर ध्यान नहीं दिया जाता। इससे बच्चे कुपोषण का शिकार हो रहे हैं। बाल रोष विशेषज्ञों के अनुसार वैसे तो जन्म से लेकर दो साल तक बच्चे के कुपोषण का शिकार होने का डर लगा रहता है। इसके बावजूद बच्चा 10 साल की आयु तक भी कुपोषण का शिकार हो सकता है। बताया कि गर्भवती महिला का यदि खानपान का विशेष ध्यान न रखा जाए तो गर्भ में ही बच्चा कुपोषण का शिकार हो सकता है।
अभिभावकों में जागरूकता की कमी के चलते बच्चे कुपोषण का शिकार हो रहे हैं। कुपोषित बच्चों को समय पर इलाज की जरूरत होती है, लेकिन अभिभावकों को यह पता ही नहीं चल पाता कि बच्चों को इलाज की जरूरत है। समय पर इलाज नहीं मिलने पर बच्चों के जीवन पर खतरा मंडरा सकता है।
-डॉ. एके मिश्रा, बाल रोग विशेषज्ञ
कुपोषित बच्चों को बचाने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। राष्ट्रीय पोषाहार माह का उद्देश्य भी कुपोषित बच्चों को ठीक करना है और बच्चों को कुपोषण का शिकार होने से रोकना है। अनेक योजनाओं के तहत बच्चों को पुष्टाहार खाद्य पदार्थ भी बांटे जा रहे हैं। हालांकि सबसे पहले अभिभावकों को जागरूक होना पड़ेगा।
-दीप सिंह, जिला बाल विकास अधिकारी