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मुसीबत में बुलाया अब किया दरकिनार

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हरिद्वार में कोरोना काल के दौरान फ्रंटलाइन वर्कर बनकर काम करने वाले पीआरडी जवानों को दो साल बाद ही दरकिनार कर दिया गया है। इस साल जिले में तैनात 677 पीआरडी जवानों में से अब तक केवल 336 को ही रोजगार देने के लिए बजट दिया गया है। कोरोनाकाल में स्थिति ये थी कि पीआरडी जवानों को अस्पताल से लेकर अन्य जगह ड्यूटी देने के लिए घर से बुलाया गया। जवानों ने भी बिना जान की परवाह किए ईमानदारी से ड्यूटी की लेकिन अब बेरोजगार पीआरडी जवानों में रोष है।
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हरिद्वार में युवा कल्याण एवं प्रांतीय रक्षक दल में इस समय 677 पीआरडी जवान रजिस्टर्ड हैं। नियमानुसार एक पीआरडी जवान को सालभर में 300 दिन का रोजगार मिलता है लेकिन अक्सर बजट कम होने या नहीं आने के चलते इन जवानों को पूरे 300 दिन का रोजगार नहीं मिल पाता। पहली बार वर्ष 2020 और 21 में पीआरडी के हर जवान को 300 दिन का रोजगार दिया गया। इसकी वजह कोरोना थी। दरअसल, इन दो सालों में पीआरडी के लिए बजट भी पूरा आया और उन्हें रोजगार भी दिया गया। पीआरडी जवानों ने इस महामारी में फ्रंटलाइन वर्कर के तौर पर काम किया। अब जबकि सबकुछ सामान्य हो गया और नया वित्तीय वर्ष शुरू हो गया है तो सरकार ने इन पीआरडी जवानों को दरकिनार कर दिया है। इस बार केवल 336 पीआरडी की ड्यूूटी विभागों में लगाने के लिए बजट जारी किया गया है। स्थिति ये है कि सरकारी विभागों में ड्यूटी के लिए जिले में 100 पीआरडी जवान मांगे गए जबकि अधिकारियों ने केवल 36 जवानों की ड्यूटी स्वीकृत की गई। ऐेसे में अन्य पीआरडी जवान बेरोजगार ही बैठे हैं।
अभी केवल 336 जवानों को ड्यूटी देने के लिए बजट स्वीकृत हुआ है। इसमें जो पीआरडी जवान लंबे समय से बेरोजगार बैठे हैं, उन्हें ड्यूटी दी जाएगी। इसके बाद अन्य जवानों के लिए बजट की मांग की जाएगी।
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-मुकेश भट्ट, डीईओ, जिला युवा कल्याण प्रांतीय रक्षक दल
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