आईआईटी रुड़की के स्वीमिंग पूल में डूबकर एक युवक की मौत हो गई है। युवक आईआईटी रुड़की के ही एक कर्मचारी का बेटा था। जिस समय युवक स्वीमिंग पूल में नहाने आया। उस समय पूल बंद था और वहां पर कोई नहीं था। पुलिस ने शव को कब्जे लेकर उसे पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है।
सबसे पहले शव को दिन में तीन बजे के करीब पूल के फिल्टर ऑपरेटर अमित निवासी गाजियाबाद ने देखा। उसने तुरंत ही इस बात की जानकारी स्पोर्ट्स आफिसर हेमंत शर्मा को दी। वह मुख्य सुरक्षा अधिकारी केपी सिंह के साथ मौके पर पहुंचे। कुछ देर में कोतवाली रुड़की के कार्यवाहक प्रभारी अजय जाटव, एसआई देवराज शर्मा और भाव सिंह चौहान भी आईआईटी पहुंच गए। बांद में जल पुलिस की मदद से शव को बाहर निकाला गया। पूल के बाहर रखे कपड़ों में मिले मोबाइल के जरिये मृतक की पहचान आईआईटी के केमिकल डिपार्टमेंट की लैब में तैनात सुरेश चंद सैनी के बेटे निशांत सैनी (22 वर्ष) निवासी सोलानी कुंज के रूप में हुई। सूचना पर मृतक के पिता मौके पर पहुंचे। बेटे का शव देखकर वह बेहाल हो गए। लोगों ने जैसे तैसे उन्हें संभाला। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर उसे पोस्टमार्टम के लिए सिविल अस्पताल की मोर्चरी में भिजवा दिया।
कपड़े, साबुन और चप्पल किनारे पर मिले
स्वीमिंग पूल के किनारे पर निशांत के कपड़े, चप्पल और साबुन रखे मिले हैं। इसके अलावा एक ही व्यक्ति के पांव के निशानों की छाप भी मिली। कोतवाली रुड़की के कार्यवाहक प्रभारी अजय जाटव का कहना है कि इन बातों से स्पष्ट है कि निशांत सैनी अकेले ही स्वीमिंग पूल में नहाने आया था और वह किसी दुर्घटना का शिकार हो गया।
दशहरे पर बंद था पूल
रुड़की। सोमवार को स्वीमिंग की छुट्टी रहती है। बुधवार को मोहर्रम की छुट्टी के कारण भी पूल बंद रहना है। फिल्टर ऑपरेटर अमित ने बताया कि तीन दिन की छुट्टी होने की वजह से पूल को सफाई आदि के लिए खाली किया जा रहा था। इसमें आधा पानी ही रह गया था। वह दोपहर एक बजे लंच पर गया था। इसके बाद करीब तीन बजे वह वापस आया तो युवक का शव पानी में पड़ा था। एक से तीन बजे के बीच ही युवक वहां आया होगा।
हर जगह रोकते हैं फिर यहां क्यों नही रोकते
रुड़की। बेटे की मौत से दु:खी होकर विलाप कर रहे सुरेश चंद सैनी बार-बार यही कह रहे थे कि आईआईटी रुड़की में जगह-जगह सिक्योरिटी गार्ड हैं जो लोगों को कहीं भी आने जाने से रोकते रहते हैं, फिर स्विमिंग पुल में आने से क्यों नहीं रोकते। यदि यहां भी सिक्योरिटी की व्यवस्था होती तो उनका बेटा जीवित होता। हालांकि इस संबंध में आईआईटी के अधिकारियों का कहना है कि छुट्टी में स्वीमिंग पूल बंद कर दिया जाता है। उसके गेट पर ताला रहता है। लेकिन कभी-कभी लोग पूल की बाउंड्री से कूदकर भीतर आ जाते हैं।
परिवार में इकलौता बेटा था निशांत
रुड़की। निशांत परिवार में इकलौता बेटा था। निशांत की मौत से परिवार का रो-रोकर बुरा हाल है। निशांत के पिता बार-बार बस यही कह रहे हैं कि निशांत तू हमे छोड़कर कहां चला गया। सोलानीकुंज निवासी निशांत की दो बड़ी बहने हैं। एक बहन ऊर्जा निगम में एसडीओ है। सबसे छोटा होने के कारण निशांत अपनी बहनों और मम्मी-पापा का लाड़ला था। पिता सुरेश चंद सैनी अपने बेटे निशांत को इंजीनियर बनाना चाहते थे। उसका प्रवेश भी इंजीनियरिंग कालेज में करा दिया था। लेकिन पिछले डेढ़ साल से उसका स्वास्थ्य ठीक नहीं चल रहा था। उसका उपचार मैक्स अस्पताल में चल रहा था। जिसके कारण उसे बीच में ही कालेज छोड़ना पड़ गया था। जिसके बाद अब उसे पॉलीटेक्निक कालेज में प्रवेश दिलाया था। निशांत की मौत से पिता सुरेश चंद शर्मा और उनका पूरा परिवार गहरे सदमे में है।