एक के बाद एक लापरवाही से एक बच्चे की जान चली गई। मृतक बच्चा कलियर में एक रिक्शा चलाने वाले का बेटा था। पहले अनाधिकृत रूप से बंद पड़े खोखे में रखे फ्रिज से उसे करंट लगा। फिर सूचना के एक घंटे बाद तक 108 और पुलिस नहीं पहुंची। थक हारकर लोगों ने रिक्शे से उसे अस्पताल पहुंचाया, जहां चिकित्सक ने उसे मृत घोषित कर दिया। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार करंट लगने के बाद भी उसकी सांस चल रही थी। ऐसे में अगर समय से उसे उपचार मिल जाता तो जान बच सकती थी।
कूड़ा बीनने के दौरान लगा करंट
घटनाक्रम के अनुसार बृहस्पतिवार को दोपहर करीब साढ़े 12 बजे रुड़की रोडवेज बस अड्डा परिसर में एक आठ साल का बच्चा कूड़ा बीन रहा था। इसी दौरान बसों के आसपास से बोतलें एकत्रित करता हुआ वह बंद पड़े एक खोखे के पास पहुंचा, जहां से खाली बोतल उठाने के चक्कर में वह खोखे से निकले फ्रिज के तार की चपेट में आ गया, जिससे करंट लगने पर वह वहीं पर बेहोश हो गया।
घटना के बाद आसपास के लोगों ने पुलिस और 108 को सूचना दी, लेकिन किसी के कान पर जूं नहीं रेंगी। पास में पुलिस पिकेट होने के बावजूद करीब एक घंटे बाद मौके पर होमगार्ड के दो जवान पहुंचे, जिनकी मदद से एक रिक्शे वाले ने जमीन पर पड़े बच्चे को सिविल अस्पताल पहुंचाया, जहां चिकित्सक ने उसे मृत घोषित कर दिया।
इसके बाद मौके पर दो चेतक पुलिस वाले और 108 सेवा की एंबुलेंस पहुंची। सिविल लांइस कोतवाली प्रभारी योगेंद्रपाल सिंह भदौरिया का कहना है कि सूचना मिलते ही चेतक पुलिस को निर्देश दिए गए थे, संभवत: किसी अन्य घटना के कारण पुलिसकर्मियो को पहुंचने में विलंब हुआ।
खोखा हट गया होता तो नहीं होता हादसा
रुड़की रोडवेज डिपो में रखे जिस खोखे में करंट आने से हादसा हुआ, उसका अनुबंध दो माह पहले ही खत्म हो गया था। टीन की चादरों से अस्थायी रूप से रखा गया गया खोखा अगर हटा दिया गया होता तो एक बच्चे को जान से हाथ नहीं धोना पड़ता, लेकिन न रोडवेज प्रबंधन ने खोखा हटाने की सुध ली और न ही संचालक ने।
बच्चे की नहीं हो सकी शिनाख्त
रोडवेज बस अड्डे पर कूड़ा बीनने के दौरान करंट की चपेट में आकर जान गंवाने वाले बच्चे की बृहस्पतिवार की देर शाम तक शिनाख्त नहीं हो सकी। पुलिस के अनुसार बच्चे की शिनाख्त के लिए प्रयास किए जा रहे हैं।